IT की नौकरी छूटी तो रच दिया इतिहास... जानिए कौन है भारत की पहली ट्रांसजेंडर अंपायर Rithika Sri
Rithika Sri India's First Transwoman Umpire: मैकेनिकल इंजीनियरिंग में डिप्लोमा धारक ऋतिका आज देश की पहली ऐसी ट्रांस-महिला हैं, जिनके फैसलों पर क्रिकेट ...और पढ़ें
Publish Date: Thu, 30 Apr 2026 03:01:02 PM (IST)Updated Date: Thu, 30 Apr 2026 03:01:02 PM (IST)
भारत की पहली ट्रांसजेंडर अंपायर Rithika SriHighLights
- ऋतिका श्री बनीं भारत की पहली ट्रांसजेंडर क्रिकेट अंपायर, जेंडर की दीवारें तोड़ीं
- मैकेनिकल इंजीनियर ऋतिका ने आईपीएल देखने के बाद अंपायरिंग को बनाया करियर
- कोयंबटूर के स्टेडियम गेट पर 45 मिनट तक अपमान सहने के बाद मिली थी पहली एंट्री
स्पोर्ट्स डेस्क। कोयंबटूर की 31 वर्षीय ऋतिका श्री (Rithika Sri India's First Transwoman Umpire) ने उन तमाम रूढ़ियों को तोड़ दिया है जो जेंडर के आधार पर लोगों को बांटती हैं। मैकेनिकल इंजीनियरिंग में डिप्लोमा धारक ऋतिका आज देश की पहली ऐसी ट्रांस-महिला हैं, जिनके फैसलों पर क्रिकेट के मैदान में खिलाड़ी 'मैम' कहकर मुहर लगाते हैं।
मोहाली की IT जॉब से सलेम के मैदान तक का सफर
ऋतिका का सफर साल 2019 में पंजाब के मोहाली से शुरू हुआ था। तब वह एक बीपीओ में काम करती थीं और उन्हें 'मुथुराज' के नाम से जाना जाता था। आईपीएल मैचों को करीब से देखते हुए उनके मन में अंपायरिंग का सपना जागा। कोरोना महामारी के दौरान नौकरी छूटी, तो वह अपने होमटाउन सलेम (तमिलनाडु) लौट आईं। यहां उन्हें जिला मुख्य अंपायर जयरामन का साथ मिला, जिन्होंने ऋतिका की पहचान को स्वीकार किया और उन्हें अंपायरिंग की बारीकियां सीखने के लिए प्रोत्साहित किया।
जब सुरक्षा गार्ड ने स्टेडियम में घुसने से रोका
ऋतिका के लिए सबसे चुनौतीपूर्ण पल वह था जब पिछले साल सितंबर में उन्हें एक मैच के लिए कोयंबटूर के एक संस्थान में जाना था। गेट पर तैनात सुरक्षा गार्ड ने उन्हें अंदर जाने से रोक दिया और बाहर भगा दिया। ऋतिका बताती हैं, "गार्डों की टोली ने मुझे रोक रखा था। करीब 45 मिनट के इंतजार और कई फोन कॉल्स के बाद मुझे एंट्री मिली। उस वक्त मैं बहुत भावुक थी। मैंने खुद से पूछा- क्या एक ट्रांसजेंडर सम्मानजनक और सामान्य जीवन नहीं जी सकता?"
तिरस्कार के बीच मिला एसोसिएशन का साथ
अपमान झेलने के बावजूद ऋतिका ने हार नहीं मानी। कोयंबटूर क्रिकेट एसोसिएशन के अधिकारियों और सीनियर अंपायरों ने उनका पूरा समर्थन किया। आज स्थिति यह है कि मैदान पर खिलाड़ी उन्हें पूरे सम्मान के साथ संबोधित करते हैं। ऋतिका अपनी सफलता का श्रेय अपनी माँ को देती हैं, जिन्होंने अकेले ही छह बच्चों को पाला और हर मुश्किल घड़ी में उनके साथ खड़ी रहीं।