
नईदुनिया, रायपुर, लक्ष्मी कुमार। भारतीय शास्त्रीय नृत्य की सजीव परंपरा ऐसे लोग भी समझ सके, जो इसे आसानी से नहीं समझ पाते हैं। इस सोच के साथ 11वीं में पढ़ने वाली इनाया अग्रवाल ने एआइ की मदद से अभिव्यक्ति नामक डिजिटल कथक एप्लिकेशन बनाया है। इनाया कथक की पांचवीं वर्ष की छात्रा भी है। यह एप्लिकेशन कथक सीख रहे साधकों के अलावा ऐसे स्पेशल लोग जो नृत्य तो करते हैं, लेकिन ध्वनि सुन नहीं सकते, उनके लिए काफी लाभकारी है।
एप को बनाने में एक वर्ष का समय लगा। दो से तीन बार असफलता भी मिली, लेकिन दोबारा जानकारी इकट्ठा करते हुए अनुसंधान कर इस एप को बनाने में सफलता हासिल की। इसे कोई भी डाउनलोड कर उपयोग कर सकता है। फिलहाल इस एप्लीकेशन में आगे भी काम किया जा रहा है, ताकि कथक सीखने वालों को भाव-भंगिमा, संस्कृत के श्लोक, लय, मुद्राएं सहित कई महत्वपूर्ण जानकारी मिल सके।
एप से क्या मिलेगा सीखने
इनाया का कहना है कि इस प्लेटफार्म में कथक की लय, हस्त मुद्राएं, भाव-भंगिमा तथा कथात्मक संरचना को संरचित दृश्य एवं पाठ्य प्रारूप में प्रस्तुत किया जाता है। कई बार ऐसे दर्शक जो पहली बार कथक देखते हैं खास तौर पर विदेशी दर्शक भी कलाकारों की प्रस्तुति को एप से समझ सकेंगे। इसमें गणेश वंदना, वक्रतुंड, गुरु वंदना, विष्णु वंदना, शिव वंदना, गायत्री मंत्र, सरस्वती वंदना, कृष्ण वंदना, महालक्ष्मी स्तुति, दशावतार, नटराज ध्यान सहित अनेक प्रमुख श्लोक, स्तुतियां एवं कथात्मक रचनाएं समाहित की गई हैं। एप की कार्यप्रणाली अत्यंत आधुनिक है। अवेकन द सिस्टम के माध्यम से आरएजी आर्किटेक्चर, सेंटेंस ट्रांसफार्मर्स, फेइस वेक्टर सर्च, व्हिस्पर एवं मिस्ट्रल एआई जैसे उन्नत मशीन लर्निंग उपकरणों का उपयोग कर आडियो को ट्रांसक्राइब किया जाता है। संबंधित श्लोक से मिलान किया जाता है और उसके आधार पर प्रस्तुति मार्गदर्शिका, मुद्राओं का विवरण तथा दृश्य गैलरी तैयार की जाती है।
श्रवण बाधित के लिए मददगार
उपयोगकर्ता श्लोक रिकार्ड या अपलोड कर सकते हैं, जिसके पश्चात श्लोक का पूर्ण पाठ, अर्थ, भावार्थ, प्रस्तुति मार्गदर्शन एवं हस्त मुद्राओं के फोटोग्राफ उपलब्ध होते हैं। विशेष रूप से श्रवण बाधित उपयोगकर्ताओं के लिए यह एप दृश्य व्याख्या एवं संरचित विवरण के माध्यम से सुलभ बनाया गया है। यह डिजिटल एप अपनी संस्कृति संरक्षण के लिए काफी महत्वपूर्ण है। शास्त्रीय नृत्य में गुरु-शिष्य परंपरा होती है। एप्लीकेशन भी इसी तरह समझाने में सहयोग कर रहा है। एप को बनाने में संगीताचार्य डा. दीपक बेडेकर ने प्रेरणा दी।
इनाया को मिला अवार्ड
यह एप्लीकेशन काफी मददगार साबित हो सकता है। 16 वर्षीय इनाया ने इस माडल को नई दिल्ली में हुए तीन दिवसीय आइआरआइएस नेशनल फेयर में भी दिखाया। इसमें छात्रा को स्वर्ण पदक मिला। वहीं इंडियन नेशनल साइंस एंड इंजीनियरिंग फेयर में इस माडल को रजत पदक मिल चुका है।
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