
अमित मिश्रा, नईदुनिया। ग्वालियर। साइबर ठगों के नित नए तरीकों से आम लोग अपनी मेहनत की कमाई गंवा रहे हैं। साइबर क्राइम पुलिस ने अपने विश्लेषण में पाया है कि ठगी होते ही लोग घबरा जाते हैं लेकिन यही समय महत्वपूर्ण होता है। ठगी होते ही यदि 120 मिनट (दो घंटे) में नेशनल साइबर क्राइम पोर्टल या साइबर हेल्पलाइन या फिर स्थानीय पुलिस तक शिकायत पहुंच जाए तो ठगी गई राशि होल्ड की जा सकती है। पुलिस भी इसे 'गोल्डन आवर' मंत्र बता रही है।
हाल में कई ऐसे मामले सामने आए हैं, जिनमें दो घंटे के भीतर पीड़ितों ने साइबर हेल्पलाइन में शिकायत की। नतीजतन ठगों के रकम उड़ा लेने से पहले ही बैंक खाता फ्रीज हो गया, ठगी की रकम होल्ड हो गई। बाद में यह रकम पीड़ित को वापस मिली। साइबर विशेषज्ञ भी बताते हैं कि साइबर ठगी के बाद के शुरुआती समय में ही पीड़ित की सक्रियता तय करती है कि रुपये मिलेंगे या नहीं।
इस तरह हेराफेरी करते हैं ठग
राज्य साइबर सेल और पुलिस ने पाया है कि ठग अमूमन तीन चरणों में ठगी की रकम की हेराफेरी करते हैं। पहले चरण में पीड़ित के खाते से चार-पांच खातों में रुपये ट्रांसफर किए जाते हैं। दूसरे चरण में इन चार-पांच खातों से 30-35 और अगले यानी तीसरे चरण में 30-35 खातों से 150 से 200 खातों में। ये खाते म्यूल यानी किराये के होते हैं और इतनी अधिक संख्या में खाते होने से पुलिस मूल अपराधी तक पहुंच ही नहीं पाती। इसके बाद धन यूएसडीटी के जरिये क्रिप्टो में कन्वर्ट होता है और विदेश पहुंच जाता है। पुलिस कई मामलों में यह देख चुकी है।
रामकृष्ण मिशन आश्रम के सचिव स्वामी सुप्रदिप्तानंद को डिजिटल अरेस्ट कर 2.52 करोड़ रुपये की ठगी हुई। इनके बैंक खाते से पहले चरण 12 बैंक खातों में धनराशि भेजी गई। दूसरे चरण में इन 12 खातों से 68 बैंक खाते और तीसरे चरण में 68 बैंक खातों से 176 बैंक खातों में धन गया।
गोल्डन आवर इसलिए महत्वपूर्ण
एक खाते से दूसरे में रुपये ट्रांसफर करने में अमूमन दो मिनट का समय मान लें तो दूसरे चरण के 30-35 खातों तक रुपये ट्रांसफर करने में करीब दो घंटे का समय लगता है। इस बीच यदि शिकायत मिल जाए तो जिस खाते में रुपया गया है उसे तुरंत फ्रीज करा दिया जाता है।
ठगी के दो घंटे में करें ये तीन काम
साइबर एक्सपर्ट चातक वाजपेयी कहते हैं कि ठगी का आभास होते ही साइबर हेल्पलाइन 1930 पर काल करें। यहां से मैसेज, ई-मेल जाते ही बैंक तुरंत खाता फ्रीज करता है। दूसरे चरण में cybercrime.gov.in पर दो घंटे के भीतर शिकायत करें। तीसरे चरण में बैंक की आधिकारिक वेबसाइट, एप से कस्टमर केयर नंबर निकालें, अपना खाता ब्लाक करें और दूसरे खाते में रुपया ट्रांसफर होने की जानकारी दें।
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