1 अप्रैल से बदल जाएंगे डिजिटल पेमेंट के नियम, टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन होगा लागू
1 अप्रैल 2026 से डिजिटल पेमेंट में 2FA अनिवार्य होगा। अब केवल OTP नहीं, बल्कि दो वेरिफिकेशन जरूरी होंगे, जिससे साइबर फ्रॉड पर लगाम लगेगी और ट्रांजैक्श ...और पढ़ें
Publish Date: Mon, 30 Mar 2026 02:43:19 PM (IST)Updated Date: Mon, 30 Mar 2026 02:43:19 PM (IST)
डिजिटल पेमेंट में होगा बड़ा बदलाव। (फाइल फोटो)HighLights
- 1 अप्रैल से डिजिटल पेमेंट में 2FA अनिवार्य लागू होगा।
- अब केवल OTP से ट्रांजैक्शन पूरा नहीं हो पाएगा।
- दो अलग तरीकों से यूजर वेरिफिकेशन करना होगा अनिवार्य।
टेक्नोलॉजी डेस्क। डिजिटल पेमेंट करने वाले करोड़ों यूजर्स के लिए 1 अप्रैल 2026 से बड़ा बदलाव लागू होने जा रहा है। Reserve Bank of India के निर्देश के बाद अब सभी ऑनलाइन ट्रांजैक्शन के लिए टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन (2FA) अनिवार्य किया जा रहा है।
इसका सीधा मतलब है कि अब सिर्फ ओटीपी के जरिए पेमेंट पूरा नहीं होगा, बल्कि यूजर्स को अपनी पहचान दो अलग-अलग तरीकों से सत्यापित करनी होगी। यह बदलाव बढ़ते साइबर फ्रॉड पर रोक लगाने के लिए किया जा रहा है।
1 अप्रैल से क्या बदलेगा
अब तक अधिकांश ऑनलाइन ट्रांजैक्शन केवल ओटीपी के जरिए पूरे हो जाते थे, लेकिन नए नियम लागू होने के बाद हर डिजिटल पेमेंट के लिए दो स्तर पर वेरिफिकेशन जरूरी होगा। यानी किसी भी ट्रांजैक्शन को पूरा करने से पहले यूजर को अतिरिक्त सुरक्षा प्रक्रिया से गुजरना होगा। इससे पेमेंट सिस्टम पहले से ज्यादा सुरक्षित हो जाएगा।
2FA में कौन-कौन से विकल्प होंगे
नए नियम के तहत यूजर्स को कम से कम दो अलग-अलग वेरिफिकेशन तरीकों का इस्तेमाल करना होगा। इनमें ओटीपी (वन टाइम पासवर्ड), पिन (पर्सनल आइडेंटिफिकेशन नंबर), बायोमेट्रिक (फिंगरप्रिंट या फेस रिकग्निशन) और बैंकिंग ऐप से जनरेट वर्चुअल टोकन शामिल हैं। उदाहरण के तौर पर, ओटीपी के साथ पिन या बायोमेट्रिक वेरिफिकेशन जरूरी होगा। दोनों चरण पूरे होने के बाद ही पेमेंट सफल मानी जाएगी।
क्यों जरूरी हुआ यह बदलाव
हाल के वर्षों में फिशिंग, सिम स्वैप और ओटीपी फ्रॉड के मामलों में तेजी से बढ़ोतरी हुई है। साइबर अपराधी यूजर्स का ओटीपी हासिल कर उनके बैंक खातों से रकम निकाल लेते हैं। ऐसे में केवल एक स्तर की सुरक्षा पर्याप्त नहीं रह गई थी।
सुरक्षा होगी और मजबूत
विशेषज्ञों का मानना है कि 2FA लागू होने से अनधिकृत ट्रांजैक्शन पर काफी हद तक रोक लगेगी। इससे यूजर्स के पैसे की सुरक्षा बढ़ेगी और डिजिटल पेमेंट सिस्टम पर भरोसा भी मजबूत होगा।