नई गाड़ी खरीदने से पहले चेक करें ई-20 कंपैटिबिलिटी, डिस्काउंट के चक्कर में कहीं फंस न जाएं
New Vehicle Purchase: वाह डीलर भारी डिस्काउंट देकर पुराना स्टॉक थमा सकते हैं जो ई-20 यानि 20% एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल के अनुकूल नहीं है।
Publish Date: Wed, 01 Jul 2026 02:01:07 PM (IST)Updated Date: Wed, 01 Jul 2026 02:18:59 PM (IST)
डिस्काउंट के लालच से बचकर गाड़ी ई-20 कंपैटिबल है या नहीं इसकी जांच जरूर करें। एआई इमेजHighLights
- ई गाड़ी खरीदने का प्लान है तो शोरूम जाने से पहले सावधान हो जाएं
- सरकार ने पेट्रोल में अब 20% एथेनॉल मिलाना अनिवार्य कर दिया है
- गाड़ी खरीदने से पहले इनवॉइस पर लिखित में ई-20 कंपैटिबल की पुष्टि लें
नईदुनिया प्रतिनिधि, ग्वालियर। यदि आप इस समय नई कार या बाइक खरीदने का प्लान बना रहे हैं, तो शोरूम जाने से पहले थोड़ा अलर्ट हो जाइए। डीलर आपको भारी-भरकम डिस्काउंट या आकर्षक आफर्स का लालच देकर पुराना माडल थमा सकते हैं। गाड़ी की चमक-दमक देखने के साथ ही सबसे पहले यह पुख्ता कर लें कि वह वाहन ई- 20 यानि 20 प्रतिशत एथेनाल मिश्रित पेट्रोल के अनुकूल है या नहीं।
दरअसल, सरकार ने देश में प्रदूषण कम करने और कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता घटाने के लिए पेट्रोल में 20 फीसदी एथेनाल मिलाना (ई-20) अनिवार्य कर दिया है। सरकार का अगला लक्ष्य इस मात्रा को धीरे-धीरे बढ़ाकर 30 से 85 फीसदी तक ले जाने का है। ऐसे में यदि आप पुराना स्टाक का वाहन खरीद लेते हैं, तो भविष्य में आपको बड़ी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।
क्या है ई-20 पेट्रोल और इससे पुराने वाहनों को नुकसान
कार एक्सपर्ट साजिद खान के मुताबिक ई-20 का मतलब है ऐसा ईंधन जिसमें 80 प्रतिशत पेट्रोल और 20 प्रतिशत एथेनाल का मिश्रण होता है। एथेनाल की प्रकृति रासायनिक रूप से सामान्य पेट्रोल से काफी अलग होती है। यदि आप इसे किसी ऐसे पुराने वाहन में डालते हैं जो इसके लिए डिज़ाइन नहीं किया गया है, तो गंभीर नुकसान हो सकते हैं।
ये हो सकते हैं नुकसान
- इंजन के पार्ट्स का गलना : एथेनाल नमी को बहुत जल्दी सोखता है। पुराने वाहनों के फ्यूल टैंक, पाइप और इंजन में इस्तेमाल होने वाले रबर, प्लास्टिक और एल्युमिनियम के पार्ट्स एथेनाल के संपर्क में आकर धीरे-धीरे गलने या सड़ने लगते हैं।
जंग की समस्या : ईंधन टैंक और पाइपलाइन में नमी बढ़ने के कारण अंदरूनी हिस्सों में तेजी से जंग लगने लगती है, जिससे फ्यूल सप्लाई ब्लाक हो सकती है।
माइलेज और परफार्मेंस में गिरावट : पुराने इंजन इस फ्यूल को पूरी तरह बर्न नहीं कर पाते। इससे गाड़ी का माइलेज अचानक गिर जाता है और चलते-चलते गाड़ी झटके मारने लगती है।
इंजन का सीज होना : एथेनाल के कारण पिस्टन और कंबशन चैंबर का तापमान असंतुलित हो जाता है, जिससे इंजन के पूरी तरह खराब या सीज होने का खतरा बढ़ जाता है। नया वाहन खरीदते समय बरतें ये सावधानियां
कंपनियां अपने पुराने बीएस-6 (फेज 1) या गैर-ई-20 स्टाक को निकालने के लिए भारी छूट का सहारा ले रही हैं। इस जाल में फंसने से बचने के लिए इन बातों का विशेष ध्यान रखें।
- फ्यूल लिड और मैन्युअल चेक करें : नए वाहनों के फ्यूल टैंक के ढक्कन पर या उसके पास स्पष्ट रूप से ई-20 या ई 20 कंपैटिबिलिटी का स्टिकर लगा होता है। गाड़ी के यूजर मैन्युअल में भी इसकी जानकारी जरूर जांचें।
- आरटीओ रजिस्ट्रेशन और निर्माण का साल : गाड़ी के चेसिस नंबर से यह सुनिश्चित करें कि गाड़ी का निर्माण हालिया महीनों का ही है। डीलर्स के झांसे में न आएं कि सब गाड़ियों में चलता है।
- लिखित में लें पुष्टि : बुकिंग एग्रीमेंट या इनवाइस पर डीलर से साफ तौर पर लिखवाएं कि वाहन पूरी तरह से ई-20 कंपैटिबल है।
- फ्लेक्स-फ्यूल मॉडल्स को प्राथमिकता : यदि संभव हो, तो उन माडल्स को चुनें जो फ्लेक्स-फ्यूल को सपोर्ट करते हैं, क्योंकि आने वाले समय में एथेनाल का प्रतिशत और बढ़ने वाला है।
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