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स्टार्टअप बदल रहे इंदौर शहर की तस्वीर, ट्रैफिक, स्वास्थ्य और पर्यावरण की चुनौतियों का मिल रहा समाधान

शहर में बड़ी संख्या में स्टार्टअप और युवा शोधकर्ता ऐसी तकनीक विकसित कर रहे हैं, जो केवल कारोबार तक सीमित नहीं है, बल्कि आम लोगों की नियमित समस्याओं का...और पढ़ें

By bharat mandhanyaEdited By: Ramnath Mutkule
Publish Date: Tue, 30 Jun 2026 12:06:44 PM (IST)Updated Date: Tue, 30 Jun 2026 12:06:44 PM (IST)
स्टार्टअप बदल रहे इंदौर शहर की तस्वीर, ट्रैफिक, स्वास्थ्य और पर्यावरण की चुनौतियों का मिल रहा समाधान
इनक्यूबेशन सेंटर में विभिन्न तकनीकों पर किया जा रहा कार्य। (सौजन्य)

HighLights

  1. देश के सबसे स्वच्छ शहर के रूप में पहचान बना चुके इंदौर में अब इनोवेशन की नई लहर भी दिखाई दे रही है
  2. शहर में बड़ी संख्या में स्टार्टअप और युवा शोधकर्ता ऐसी तकनीक विकसित कर रहे हैं, जो आम लोगों की नियमित समस्याओं का समाधान भी तलाश रही है
  3. स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक सटीक बनाना हो, ट्रैफिक जाम से राहत दिलानी हो या फिर पर्यावरण को बचाना हो, इंदौर के युवाओं के प्रयास नई दिशा दे रहे हैं

नईदुनिया प्रतिनिधि, इंदौर। देश के सबसे स्वच्छ शहर के रूप में पहचान बना चुके इंदौर में अब इनोवेशन की नई लहर भी दिखाई दे रही है। शहर में बड़ी संख्या में स्टार्टअप और युवा शोधकर्ता ऐसी तकनीक विकसित कर रहे हैं, जो केवल कारोबार तक सीमित नहीं है, बल्कि आम लोगों की नियमित समस्याओं का समाधान भी तलाश रही है। स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक सटीक बनाना हो, ट्रैफिक जाम से राहत दिलानी हो या फिर प्लास्टिक की खपत कम कर पर्यावरण को बचाना हो, इंदौर के युवाओं के प्रयास नई दिशा दे रहे हैं।

शहर के विभिन्न शैक्षणिक संस्थानों और स्टार्टअप्स द्वारा तैयार किए जा रहे इन नवाचारों का उद्देश्य तकनीक को सीधे समाज से जोड़ना है। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले वर्षों में ऐसे समाधान शहरों को अधिक स्मार्ट, सुरक्षित और टिकाऊ बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।


स्मार्ट ट्रैफिक सिग्नल से जाम पर लगेगी लगाम

डीएवीवी के विद्यार्थियों पीयूष पांडेय, पराग परमार और विवेक व्यास ने ट्रैफिक प्रबंधन के लिए भी एआई आधारित समाधान तैयार किया है। इस माडल में कैमरों के माध्यम से चौराहों पर वाहनों की संख्या का रियल टाइम विश्लेषण किया जाता है। इसके आधार पर ट्रैफिक सिग्नल का समय स्वतः कम या ज्यादा किया जा सकता है। यदि किसी दिशा में वाहनों की संख्या अधिक होगी तो उस ओर ग्रीन सिग्नल का समय बढ़ जाएगा, जबकि कम ट्रैफिक वाले मार्ग पर समय घट जाएगा। इससे अनावश्यक इंतजार कम होगा और ट्रैफिक का प्रवाह बेहतर बनेगा। यही नहीं, यह सिस्टम एंबुलेंस और फायर ब्रिगेड जैसे आपातकालीन वाहनों को प्राथमिकता देकर उनके लिए रास्ता भी आसान बना सकता है।

एआई मॉडल से होगी बीमारी की अधिक सटीक पहचान

स्वास्थ्य क्षेत्र में भी इंदौर के शोधकर्ता महत्वपूर्ण काम कर रहे हैं। एसजीएसआईटीएस के प्रोफेसर और विद्यार्थियों एक ऐसा आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) माडल विकसित किया है, जो मरीज की अलग-अलग प्रकार की मेडिकल रिपोर्ट का एक साथ विश्लेषण कर बीमारी की गंभीरता का बेहतर अनुमान लगा सकता है। इस माडल में एक्स-रे, सीटी स्कैन, एमआरआई, ब्लड टेस्ट और मरीज की मेडिकल हिस्ट्री सहित 11 प्रकार के डेटा का उपयोग किया जाता है। अभी तक माडल को सीमित मरीजों के डेटा पर प्रशिक्षित किया गया है और लगातार नए डाटा जोड़कर इसकी सटीकता बढ़ाई जा रही है।भविष्य में यह तकनीक डॉक्टरों को निर्णय लेने में सहायता करेगी और मरीजों का उपचार अधिक प्रभावी हो सकेगा।

प्रदूषण कम करने का प्रयास

एसजीएसआईटीएस के सिविल इंजीनियरिंग विभाग के रवींद्र पवार ने निर्माण क्षेत्र से जुड़ी एक बड़ी पर्यावरणीय समस्या का भी समाधान खोजने की दिशा में सफलता हासिल की है। उन्होंने पराली और एप्रीकाट वेस्ट का उपयोग कर ऐसी सीमेंट विकसित की है, जिससे सीमेंट निर्माण के दौरान होने वाले कार्बन उत्सर्जन को कम किया जा सके। इससे न केवल सीमेंट की गुणवत्ता बनी रहती है, बल्कि उत्पादन प्रक्रिया में ऊर्जा की आवश्यकता और प्रदूषण भी कम होता है। पराली को खुले में जलाने से होने वाले वायु प्रदूषण को रोकने में भी यह तकनीक मददगार साबित हो सकती है।

इस दिशा में भी हो रहा कार्य

आइआइटी इंदौर में एआई आधारित डायग्नोस्टिक्स और टेलीमेडिसिन समाधान तैयार करने के लिए दृष्टि सीपीएस फाउंडेशन को टेक्नोलाजी ट्रांसलेशनल रिसर्च पार्क के रूप में स्थापित किया गया है। यहां रिसर्च और इनोवेशन पर कार्य किया जाएगा। इस प्रयास के चलते यहां चिकित्सा उपकरणों का विकास किया जा रहा है। साथ ही एआइ आधारित डायग्नोस्टिक्स और टेलीमेडिसिन समाधान विकसित होंगे। इसके अलावा स्मार्ट पहनने योग्य स्वास्थ्य निगरानी प्रणाली पर भी काम किया जा रहा है।

ये चुनौतियां अब भी

  • एआई सिस्टम को सही तरीके से काम करने के लिए पर्याप्त और सटीक डेटा की जरूरत होती है, जो हमेशा उपलब्ध नहीं होता
  • मशीन लर्निंग और एआई तकनीक में दक्ष मेनपावर की कमी
  • एआई आधारित उपकरण और तकनीकी इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार करने में अधिक खर्च आता है
  • स्वास्थ्य और उद्योग से जुड़े डेटा को सुरक्षित रखना एक महत्वपूर्ण चुनौती है
  • डाटा सुरक्षा और गोपनीयता। स्वास्थ्य के क्षेत्र में डेटा संवेदनशील होता है। इसके दुरुपयोग की आशंका रहती है

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