
ऑटो डेस्क। इंडिया में सालों साल तक लोग चालान नहीं भरते है। जिसके चलते सरकार को फंड जुटाने में दिक्कत आती हैं।
देश भर में पेंडिंग पड़े हजारों करोड़ रुपये के ट्रैफिक चालानों की वसूली करने के लिए अब सुप्रीम कोर्ट ने बेहद कड़ा रुख अपनाया है। सुप्रीम कोर्ट ने शीर्ष अदालत ने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को जुर्माना वसूलने के लिए कई कड़े और व्यावहारिक कदम उठाने का सुझाव दिया है।
सुप्रीम कोर्ट ने सुझाव दिया है कि, अगर लोग ट्रैफिक चालान का भुगतान नहीं कर रहा हैं तो इस राशि को उनके महीने के बिजली बिल में जोड़ दिया जाए। बिजली कनेक्शन कटने के डर से लोग समय पर अपने चालान का भुगतान करने के लिए मजबूर होंगे।
बता दें कि देश भर में कुल 45,000 करोड़ रुपये के ई-चालान जनरेट हुए थे जिनमें से लगभग 25,000 करोड़ रुपये ही वसूल किए जा सके हैं।
इसके अलावा सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि बकाया चालान वाली गाड़ियों को परिवहन पोर्टल पर ब्लैकलिस्ट किया जाना चाहिए। जब तक वाहन मालिक अपना पुराना चालान क्लियर नहीं करते तब तक उस गाड़ी के मालिकाना हक को ट्रांसफर करने की अनुमति नहीं मिलनी चाहिए। गाड़ी की डुप्लीकेट आरसी जारी करने और आरसी रिन्यूअल पर भी पूरी तरह से रोक लगाने की सिफारिश की गई है.
ऐसे कड़े नियमों को लाने का मकसद है कि वाहन चालक ट्रैफिक नियमों को तोड़ने से बचें और पेंडिंग पड़े चालान का जल्द से जल्द निपटारा करें.
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ई-चालान की वसूली के लिए सुप्रीम कोर्ट ने सड़कों पर गाड़ियों की रैंडम चेकिंग करने का भी सुझाव दिया है. चेकिंग के दौरान अगर किसी गाड़ी पर भारी-भरकम ई-चालान बकाया पाया जाता है तो अधिकारियों के पास उस वाहन को मौके पर ही जब्त करने का अधिकार होना चाहिए.