2017 से पहले सुरक्षा की चिंता, अब सपनों की उड़ान
सीएम योगी ने कहा कि 2017 से पहले बेटी को स्कूल भेजना हो तो परिवार को उसकी सुरक्षा की चिंता होती थी। घर में शौचालय न हो तो बेटी, बहन और मां के सम्मान की चिंता रहती थी। रसोई में धुआं हो तो स्वास्थ्य की चिंता, इलाज कराना हो तो पैसे की चिंता और घर चलाना हो तो आमदनी की चिंता होती थी।
महिला घर से बाहर निकलकर कुछ करना चाहती थी तो उसके सामने रास्ते, कनेक्टिविटी, अवसर और उस अवसर तक पहुंचने की कीमत का सवाल खड़ा होता था। जब परिवार को सुरक्षा का भरोसा नहीं होता है तो सबसे पहले बेटी के सपनों पर रोक लगती है।
भाजपा सरकार ने तय किया कि बेटी को पढ़ाना है, बढ़ाना है और सुरक्षा की चिंता भी समाप्त करनी है। हमने पहले डर हटाया, फिर बेटी को पढ़ाया, हुनर दिया और उसे रोजगार से जोड़ा। पहले सवाल था कि बेटी घर से बाहर कैसे निकलेगी, आज सवाल यह है कि उसे जाना कहां तक है।
अब कोई बेटी केवल इसलिए अपने सपनों को नहीं छोड़ेगी कि वह गरीब परिवार में पैदा हुई है। कोई महिला केवल पूंजी के अभाव में पीछे नहीं रहेगी और कोई परिवार अवसर के अभाव में विकास से दूर नहीं रहेगा। बेटी की सुरक्षा से खिलवाड़ करने वाले अपराधियों के लिए जेल या जहन्नुम के अलावा कोई तीसरा रास्ता नहीं है।
पूर्वांचल, बुंदेलखंड, गंगा और गोरखपुर लिंक जैसी एक्सप्रेसवे परियोजनाओं ने आवागमन को आसान बनाया है। बेहतर कनेक्टिविटी से स्कूल-कॉलेज, बाजार, रोजगार और कार्यस्थल की दूरी कम होती है। इसका सबसे बड़ा लाभ महिलाओं व बेटियों को मिलता है। सड़क और परिवहन व्यवस्था केवल विकास का ढांचा नहीं, बल्कि महिलाओं के अवसरों तक पहुंचने का माध्यम भी है।
जन्म से लेकर विवाह तक बेटियों के साथ सरकार
मुख्यमंत्री ने कहा कि केंद्र व प्रदेश सरकार ने बेटी के जीवन के अलग-अलग चरणों को ध्यान में रखकर योजनाएं तैयार की हैं। ‘बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ’, प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना और मुख्यमंत्री कन्या सुमंगला योजना इसी दिशा में प्रयास हैं। मुख्यमंत्री कन्या सुमंगला योजना के तहत बेटी के जन्म से स्नातक तक की पढ़ाई के लिए 25 हजार रुपये का पैकेज दिया जा रहा है।
बेटी के विवाह योग्य होने पर मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना के माध्यम से उसका विवाह कराया जा रहा है। समाजवादी पार्टी के लोग इस योजना का मजाक उड़ाते थे और इसे बेटी का अपमान बताते थे। आज इसी योजना के तहत पांच लाख से अधिक बेटियों का विवाह संपन्न हो चुका है।
50 हजार मेधावी बेटियों को जल्द स्कूटी
सीएम ने कहा कि कस्तूरबा गांधी विद्यालयों का विस्तार किया जा रहा है। पहले ये विद्यालय कक्षा छह से आठ तक संचालित होते थे, अब इन्हें 12वीं तक चलाने की दिशा में काम हो रहा है। अटल आवासीय विद्यालयों में बेटियों के लिए आधी सीटें रखी गई हैं। सैनिक स्कूलों में भी बेटियों के लिए अवसर बढ़ाए गए हैं।
बेटियों व युवाओं को टैबलेट और स्मार्टफोन देने की योजना भी आगे बढ़ाई गई है। जल्द ही स्नातक अंतिम वर्ष की 50 हजार मेधावी बेटियों को रानी लक्ष्मीबाई स्कूटी योजना से जोड़ने की तैयारी है।
प्रोजेक्ट गंगा में चार हजार महिला डिजिटल उद्यमी
मुख्यमंत्री ने कहा कि महिला सशक्तीकरण केवल शिक्षा व सुरक्षा तक सीमित नहीं है। आर्थिक रूप से स्वावलंबी बनाना भी उतना ही जरूरी है। सरकार स्किल डेवलपमेंट मिशन, मुख्यमंत्री युवा उद्यमी योजना और अन्य योजनाओं के माध्यम से बेटियों को रोजगार और उद्यमिता से जोड़ रही है।
‘प्रोजेक्ट गंगा’ के तहत करीब आठ हजार न्याय पंचायतों में डिजिटल एंटरप्रेन्योर तैयार किए जाएंगे, जिनमें चार हजार महिला उद्यमी होंगी। ये महिलाएं गांवों में डिजिटल सेवाएं उपलब्ध कराने के साथ रोजगार के नए अवसर पैदा करेंगी।
ग्रामीण महिलाओं को बनाया आत्मनिर्भर
सीएम योगी ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी जी के विजन के अनुरूप स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से लखपति दीदी, ड्रोन दीदी और बीसी सखी जैसी पहलों को आगे बढ़ाया जा रहा है। बलिनी मिल्क प्रोड्यूसर, सामर्थ्य मिल्क प्रोड्यूसर, काशी मिल्क प्रोड्यूसर, बाबा गोरखनाथ मिल्क प्रोड्यूसर और सृजनी मिल्क प्रोड्यूसर जैसी पहलों से चार लाख से अधिक महिलाएं आर्थिक स्वावलंबन का उदाहरण पेश कर रही हैं।
ओडीओपी ने प्रदेश के परंपरागत उद्योगों को नई पहचान दी है। प्रदेश में 96 लाख से अधिक एमएसएमई इकाइयों में महिलाओं की बड़ी भागीदारी है। टेक्सटाइल व हथकरघा क्षेत्र में बड़ी संख्या में महिलाएं काम कर रही हैं।
महिला वर्कफोर्स 12 से बढ़कर 36 प्रतिशत
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में महिला वर्कफोर्स की भागीदारी पहले करीब 12 प्रतिशत थी, जो अब बढ़कर 36 प्रतिशत से अधिक हो गई है। सरकार का लक्ष्य है कि आधी आबादी को उसकी जनसंख्या के अनुपात में जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में प्रतिनिधित्व मिले।
उत्तर प्रदेश के स्टार्टअप इकोसिस्टम में 24 हजार से अधिक स्टार्टअप हैं और इनमें लगभग आधे स्टार्टअप महिलाओं द्वारा संचालित किए जा रहे हैं। महिलाएं अब केवल रोजगार पाने वाली नहीं, बल्कि रोजगार देने वाली भी बन रही हैं।
हर क्षेत्र में प्रतिभा साबित कर रही महिलाएं
सीएम योगी ने कहा कि महिलाएं स्पेस टेक्नोलॉजी, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, ड्रोन टेक्नोलॉजी, रोबोटिक्स, खेल और सेना सहित हर क्षेत्र में अपनी प्रतिभा साबित कर रही हैं। कॉमनवेल्थ गेम्स में उत्तर प्रदेश की सब-इंस्पेक्टर अस्मिता डे ने स्वर्ण पदक जीता।
नारी शक्ति वंदन अधिनियम के पारित होने के बाद महिलाओं की राजनीतिक भागीदारी का नया अध्याय खुल जाएगा। इससे लोकसभा व विधानसभाओं में महिलाओं को 33 प्रतिशत प्रतिनिधित्व का अवसर मिलेगा। महिला अब केवल परिवार की शक्ति नहीं, बल्कि समाज, अर्थव्यवस्था और राष्ट्र निर्माण में बराबर की भागीदार है।
मोदी जी ने काशी को दी वैश्विक पहचान
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी जी ने बाबा विश्वनाथ की पावन धरती काशी को वैश्विक पहचान दी है। 12 वर्षों में काशी में करीब 1 लाख करोड़ रुपये की परियोजनाएं या तो चालू स्थिति में हैं या पूरी होने वाली हैं। काशी की माताओं, नौजवानों और कारीगरों ने इस दौरान नई ऊंचाइयां हासिल की हैं। प्रधानमंत्री आवास योजना, आयुष्मान भारत और घरौनी जैसी योजनाओं के माध्यम से महिलाओं को सम्मान व अधिकार मिला है।
देश में करीब 3 करोड़ घरौनियां वितरित हुई हैं, इनमें 1 करोड़ से अधिक उत्तर प्रदेश में हैं। इन घरौनियों में महिलाओं को मालिकाना अधिकार दिया गया है। वैश्विक स्तर पर जब किसी राजनेता की चर्चा होती है तो उसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी का नाम सबसे पहले लिया जाता है।
लोकमाता के नाम पर निःशुल्क यात्रा की सुविधा
सीएम योगी ने बताया कि प्रदेश में 1.10 करोड़ से अधिक वृद्धजनों, निराश्रित महिलाओं और दिव्यांगजनों को पेंशन का लाभ दिया जा रहा है, इसे और बढ़ाने की तैयारी है। रक्षाबंधन पर 27, 28 व 29 अगस्त को बहनों-बेटियों व माताओं को परिवहन निगम व सिटी बसों में नि:शुल्क यात्रा की सुविधा दी गई।
इसके साथ ही 60 वर्ष से अधिक उम्र की माताओं को परिवहन निगम की बसों में लोकमाता अहिल्याबाई मातृशक्ति यात्रा योजना के तहत निःशुल्क यात्रा की सुविधा उपलब्ध कराई गई है।
अवसर, आत्मविश्वास और आत्मनिर्भरता तक
मुख्यमंत्री ने कहा कि भारतीय समाज ने सदियों से बेटी को परिवार की सबसे बड़ी पूंजी माना है। बड़ी जमीन, बड़ा कारोबार या बड़ी पूंजी न हो, लेकिन बेटी शिक्षित हो जाए तो पूरा परिवार स्वावलंबी बन सकता है। उन्होंने समारोह में पुष्पवर्षा के जरिए महिलाओं के सम्मान का जिक्र करते हुए कहा कि भारतीय संस्कृति का मूल भाव है- यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते रमन्ते तत्र देवता।
जन्म से लेकर शिक्षा और फिर सुरक्षित, सक्षम व आत्मनिर्भर भविष्य तक महिलाओं को आगे बढ़ाना परिवार और समाज की प्राथमिकता रही है। सरकार भी इसी प्राथमिकता को अपनी नीतियों न योजनाओं के केंद्र में रखकर बढ़ रही है।
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