यूपी के इन दर्जनभर गांवों को लोग कहते हैं 'मिनी जामताड़ा', यहां जितने ठग होते हैं गिरफ्तार, उससे ज्यादा हो जाते हैं तैयार
सचेंडी और कानपुर देहात की सीमा पर बसे करीब एक दर्जन गांव इन दिनों साइबर ठगी के बड़े अड्डे के रूप में चर्चित हैं। ...और पढ़ें
Publish Date: Thu, 09 Apr 2026 04:26:41 PM (IST)Updated Date: Thu, 09 Apr 2026 04:34:05 PM (IST)
HighLights
- सचेंडी और कानपुर देहात की सीमा पर हैं ये गांव
- बेरोजगार युवाओं को बना रहे हैं अपना निशाना
- डेटा के जरिए फैला रखा है ठगी का जाल
डिजिटल डेस्क, कानपुर। सचेंडी और कानपुर देहात की सीमा पर बसे करीब एक दर्जन गांव इन दिनों साइबर ठगी के बड़े अड्डे के रूप में चर्चित हैं। स्थानीय लोग इन्हें ‘मिनी जामताड़ा’ के नाम से पुकारते हैं। पुलिस की कई बार दबिश और कार्रवाई के बावजूद यहां साइबर अपराध का नेटवर्क लगातार फैलता जा रहा है।
ग्रामीणों के अनुसार, इन गांवों में खुलेआम खेतों, बगीचों और यहां तक कि पानी की टंकियों पर बैठकर लैपटॉप और मोबाइल के जरिए ठगी को अंजाम दिया जाता रहा है।
जितने अपराधी पकड़े जाते हैं, उससे ज्यादा शामिल हो जाते हैं
पुलिस अब तक कई अभियानों में एक दर्जन से अधिक साइबर ठगों को गिरफ्तार कर चुकी है, लेकिन हालात यह हैं कि जितने अपराधी पकड़े जाते हैं, उससे ज्यादा नए लोग इस धंधे में शामिल हो जाते हैं। इन गांवों में साइबर अपराध का बढ़ता नेटवर्क न केवल स्थानीय प्रशासन के लिए चुनौती है, बल्कि यह भी दिखाता है कि बेरोजगारी और आसान कमाई का लालच किस तरह युवाओं को अपराध की ओर धकेल रहा है।
बेरोजगार युवाओं को बना रहे निशाना
सचेंडी क्षेत्र के कैंधा गांव के एक ग्रामीण ने बताया कि यहां संगठित गिरोह सक्रिय हैं, जिनकी जानकारी पूरे गांव को होती है, लेकिन विरोध करने की हिम्मत कोई नहीं जुटा पाता। विरोध करने वालों पर गिरोह और उनके परिजन हावी हो जाते हैं।
ये गिरोह खासतौर पर बेरोजगार युवाओं और घर बैठे कमाई की चाह रखने वालों को निशाना बनाते हैं। उन्हें पहले पैसे खर्च कर ऐशो-आराम की आदत डाली जाती है, फिर उनकी जरूरतों के लिए उधार दिया जाता है। इसके बाद कर्ज के दबाव में उन्हें गिरोह में शामिल कर साइबर ठगी के तरीके सिखाए जाते हैं।
डेटा के जरिए ठगी का जाल
साइबर अपराधी ठगी के लिए विभिन्न स्रोतों से डेटा जुटाते हैं। इसमें जनसुविधा केंद्र, ई-कॉमर्स कंपनियां और डार्क वेब जैसे माध्यम शामिल हैं। इसके बाद इस डेटा को अलग-अलग श्रेणियों में बांटकर लोगों को निशाना बनाया जाता है।
सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाने के नाम पर कॉल कर ठगी का शिकार बनाया जाता है। ई-कॉमर्स ऑर्डर कैंसिल या रिफंड के बहाने ठगी की जाती है। पुलिस या जांच एजेंसी का डर दिखाकर वसूली की जाती है।
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कैसे बचें साइबर ठगी से
- विशेषज्ञों के अनुसार, थोड़ी सावधानी से इस तरह की ठगी से बचा जा सकता है:
- किसी अनजान लिंक पर क्लिक न करें
- अनजाने ऐप डाउनलोड करने से बचें
- गेमिंग ऐप पर सट्टेबाजी न करें
- बैंकिंग और यूपीआई ऐप की सुरक्षा सेटिंग मजबूत रखें
- किसी भी वीडियो या फोटो की सत्यता जांचें, वह डीपफेक हो सकता है
- यदि आप साइबर ठगी का शिकार होते हैं, तो तुरंत हेल्पलाइन नंबर 1930 पर कॉल कर साइबर सेल को सूचना दें।