डिजिटल डेस्क। नर्सरी में एडमिशन की जिद लेकर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के पास पहुंची मासूम बच्ची हो या चॉकलेट की फरमाइश करने वाले बच्चे, जिनका नाम सुनते ही अपराधी कांप उठते हैं, उन्हीं मुख्यमंत्री के सामने बच्चे पूरी सहजता से अपनी बात रख देते हैं।
कहते हैं, बच्चे मन के सच्चे होते हैं और अपने दिल की भावना बिना किसी बनावट के प्रकट कर देते हैं। ऐसा ही दृश्य तब देखने को मिला, जब एक छोटी बच्ची ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को देखते ही पूरे सम्मान के साथ सैल्यूट किया। मुख्यमंत्री ने भी मुस्कुराकर उसे मन लगाकर पढ़ने की सीख दी।
यह दृश्य न केवल मुख्यमंत्री के बालप्रेम को दर्शाता है, बल्कि उनके कोमल हृदय, सर्वसुलभ स्वभाव और संवेदनशील नेतृत्व की भी जीवंत तस्वीर पेश करता है।
भावनात्मक संवाद समय-समय पर सामने आता रहा है
मुख्यमंत्री का बच्चों से जुड़ाव और उनके साथ भावनात्मक संवाद समय-समय पर सामने आता रहा है। बीते सोमवार 'जनता दर्शन' में मां के साथ आई नन्ही अनाबी अली से हुआ संवाद इन दिनों चर्चा का विषय बना हुआ है। एडमिशन की जिद फिर एबीसीडी और कविता सुनाकर अनाबी ने मुख्यमंत्री का दिल जीत लिया।
इसी तरह मकर संक्रांति पर गोरखनाथ मंदिर में एक बच्चे से 'और क्या चाहिए' पूछना और उसके मासूम जवाब पर मुख्यमंत्री का खिलखिलाकर हंस पड़ना भी उनके बालसुलभ प्रेम को उजागर करता है। बच्चों से आत्मीय संवाद और उनके भविष्य को लेकर त्वरित निर्णय मुख्यमंत्री की गहरी संवेदनशीलता को दर्शाते हैं।
अनन्या से हुआ संवाद भी लोगों के दिलों को छू गया
बीते दिनों 'जनता दर्शन' में दो वर्षीय अनन्या से हुआ संवाद भी लोगों के दिलों को छू गया। वहीं 31 दिसंबर को एक मेजर की बेटी अंजना भट्ट ने मुख्यमंत्री से अपने मकान पर अवैध कब्जे की शिकायत की। मुख्यमंत्री ने न केवल 24 घंटे के भीतर मकान को कब्जा-मुक्त कराया, बल्कि आरोपियों पर एफआईआर दर्ज कर तत्काल गिरफ्तारी भी सुनिश्चित कराई।
यह घटना स्पष्ट संदेश देती है कि कानून-व्यवस्था, बच्चों, महिलाओं और कमजोर वर्गों से जुड़े मामलों में मुख्यमंत्री किसी भी प्रकार की ढिलाई बर्दाश्त नहीं करते।
कानपुर की मूक-बधिर खुशी गुप्ता की कहानी
कानपुर की मूक-बधिर युवती खुशी गुप्ता की कहानी भी इन दिनों हर किसी की जुबां पर है। मुख्यमंत्री से मिलने की उसकी जिद और अकेले पैदल लखनऊ पहुंचने की जानकारी जब सीएम योगी आदित्यनाथ को मिली, तो उन्होंने न केवल उससे मुलाकात की, बल्कि उसके बनाए चित्र स्वीकार कर उसके शिक्षित और सुरक्षित भविष्य का भरोसा भी दिया।
मुख्यमंत्री के इस अपनत्व से भाव-विभोर खुशी की 'अनकही भावनाओं' ने 25 करोड़ प्रदेशवासियों के बीच 'प्रदेश ही परिवार' की अवधारणा को सजीव कर दिया।
गणतंत्र दिवस परेड में बच्चों से घिरे मुख्यमंत्री
26 जनवरी को गणतंत्र दिवस परेड के दौरान बच्चे सीधे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के पास पहुंच गए। किसी ने फोटो खिंचवाई, किसी ने बात की। मुख्यमंत्री ने सभी को स्नेह दिया और एक नन्ही बच्ची को गोद में उठाकर अपना वात्सल्य भाव व्यक्त किया।
कैंसर पीड़ित बेटे के इलाज की त्वरित व्यवस्था
बीते सितंबर 'जनता दर्शन' में कानपुर के रायपुरवा निवासी एक वृद्ध मां अपने कैंसर पीड़ित बेटे की पीड़ा लेकर मुख्यमंत्री के पास पहुंची थीं। उनकी व्यथा सुनकर मुख्यमंत्री द्रवित हो उठे और तुरंत एंबुलेंस से बेटे को कल्याण सिंह सुपर स्पेशियलिटी कैंसर इंस्टीट्यूट भेजकर इलाज शुरू कराया।
ऐसे अनेक उदाहरण हैं, जो मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के बालप्रेम, जनसेवा, संवेदना और सुशासन को केवल शब्दों में नहीं, बल्कि कर्मों में भी सजीव रूप में प्रस्तुत करते हैं।