• Jagran.com
  • Jagran Josh
  • Her Zindagi
  • Onlymyhealth
  • Jagran TV
  • Vishvas News
  • Inextlive
  • मेरी खबरें
मेरी खबरें
  • होम
  • ताजा खबरें
  • मध्यप्रदेश
  • छत्तीसगढ़
  • उत्तर प्रदेश
  • देश
  • धर्म
  • मनोरंजन
  • राशिफल
  • लाइफस्टाइल
  • अन्य
    • बिज़नेस
    • बड़ी खबरें
    • खेल
    • विदेश
    • करियर
    • टॉपिक्स
    • टेक्नोलॉजी
    • कोरोना वायरस
    • शिक्षा
  • राज्य चुनें
  • ई-पेपर
  • राशिफल
  • राज्य चुनें
  • ई-पेपर
  • फटाफट
  • राशिफल
  • वेब स्टोरीज
नईदुनिया ट्रेंडिंग
  • रक्षाबंधन
  • सावन माह
  • मानसून
  • मध्‍य प्रदेश की खबरें
  • राशि परिवर्तन
  • वास्‍तु शास्‍त्र
  • स्वच्छ जल
  • होम
  • उत्तर प्रदेश
  • लखनऊ

यूपी के 558 मदरसों पर मंडराया संकट, ₹1,100 करोड़ के बजट और संदिग्ध नियुक्तियों की गोपनीय जांच शुरू

उत्तर प्रदेश के 558 अनुदानित मदरसों में वित्तीय धांधली, नियम विरुद्ध नियुक्तियों और अभिलेखों की हेराफेरी का एक बड़ा मामला सामने आया है। राज्य सरकार ने...और पढ़ें

By Digital DeskEdited By: Dheeraj Belwal
Publish Date: Mon, 24 Aug 2026 03:08:39 PM (IST)Updated Date: Mon, 24 Aug 2026 03:08:39 PM (IST)
यूपी के 558 मदरसों पर मंडराया संकट, ₹1,100 करोड़ के बजट और संदिग्ध नियुक्तियों की गोपनीय जांच शुरू
यूपी के 558 मदरसों में धांधली की जांच शुरू। (फाइल फोटो)

HighLights

  1. यूपी के 558 मदरसों में धांधली की जांच शुरू
  2. कोरोना काल की नियुक्तियों पर कसता शिकंजा
  3. मदरसा फंड और फर्जीवाड़े का अब खुलेगा राज

डिजिटल डेस्क। उत्तर प्रदेश के 558 अनुदानित मदरसों में वित्तीय धांधली, नियम विरुद्ध नियुक्तियों और अभिलेखों की हेराफेरी का एक बड़ा मामला सामने आया है। राज्य सरकार के भ्रष्टाचार निवारण संगठन (Anti-Corruption Organization) ने इन मदरसों में हुई अनियमितताओं की गोपनीय प्रारंभिक जांच शुरू कर दी है। यह पूरा मामला करीब ₹1,100 करोड़ के वार्षिक सरकारी बजट से जुड़ा हुआ है।

प्रारंभिक जांच के केंद्र में 35 प्रमुख बिंदु रखे गए हैं। इनमें कोरोना काल के दौरान की गई नियुक्तियां, अध्यापकों की निर्धारित योग्यता, विद्यार्थियों की वास्तविक संख्या, प्रबंध समितियों की वैधानिकता और वेतन भुगतान की प्रक्रिया जैसे गंभीर विषय शामिल हैं।


333 पन्नों की शिकायत में 35 बिंदुओं पर धांधली का आरोप

गृह मंत्री अमित शाह, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और भ्रष्टाचार निवारण संगठन के उच्च अधिकारियों को प्रेषित 333 पन्नों की एक विस्तृत शिकायत के आधार पर यह कदम उठाया गया है। शिकायतकर्ता मोहम्मद तलहा ने आरोप लगाया है कि प्रदेश के कई जिलों में एक ही ढर्रे पर अनियमितताएं की गई हैं, जो एक संगठित नेटवर्क की ओर इशारा करती हैं। शिकायत में मुख्य रूप से निम्नलिखित अनियमितताओं की जांच की मांग की गई है:

  • फर्जीवाड़ा और फॉरेंसिक जांच: सोसाइटी रिकॉर्ड में कथित हेरफेर, फर्जी हस्ताक्षर के जरिए प्रबंध समितियों के फैसले और सरकारी खजाने से अवैध वेतन जारी करने की फॉरेंसिक जांच।
  • चंदे और फंड का हिसाब: सरकारी अनुदान के अतिरिक्त मदरसों को मिलने वाले अन्य वित्तीय स्रोतों जैसे—चंदा, जकात, सदका और फितरा की धनराशि में हुई गड़बड़ियों की पड़ताल।
  • फाइल दबाने के आरोप: शिकायत में यह बात भी उजागर की गई है कि पूर्व में की गई कई विभागीय जांचों की रिपोर्टों को दबा दिया गया और दोषियों पर कार्रवाई नहीं की गई।

आईजी के आदेश पर डीआईजी हरिश्चन्दर संभालेंगे कमान

शिकायत की गंभीरता को देखते हुए भ्रष्टाचार निवारण संगठन के महानिरीक्षक (IG) मोहित गुप्ता ने 17 अगस्त को मामले का संज्ञान लिया। उन्होंने संगठन के उपमहानिरीक्षक (DIG) हरिश्चन्दर को इस पूरे प्रकरण की गहराई से गोपनीय जांच करने का निर्देश जारी किया है।

नियमों के मुताबिक, भ्रष्टाचार निवारण संगठन किसी भी मामले में औपचारिक प्राथमिकी (FIR) दर्ज करने से पहले प्राथमिक गोपनीय जांच करता है। इसके तहत मदरसों के नियुक्तियों, सरकारी अनुदान और वेतन वितरण से संबंधित सभी दस्तावेजों का गहन परीक्षण किया जाएगा। जरूरत पड़ने पर पुराने बंद हो चुके मामलों की फाइलें भी दोबारा खोली जा सकती हैं।

यह भी पढ़ें- यूपी में महिलाओं को रक्षाबंधन का गिफ्ट, दो दिन फ्री होगा बस का सफर, मातृत्व अवकाश की भी 2 साल की बाध्यता खत्म

अल्पसंख्यक कल्याण विभाग का पक्ष

मामले पर अल्पसंख्यक कल्याण विभाग के निदेशक शीलधर यादव ने बताया कि फिलहाल विभाग को जांच से जुड़ा कोई आधिकारिक लिखित आदेश प्राप्त नहीं हुआ है। हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि जांच एजेंसी जब भी इस संबंध में कोई दस्तावेज या जानकारी मांगेगी, उसे पूरी पारदर्शिता के साथ उपलब्ध कराया जाएगा।