जातीय समीकरणों की नई बिसात: यूपी में कश्यप-निषाद को अनुसूचित जाति का दर्जा देने की मांग, नई सोशल इंजीनियरिंग की कोशिश
उत्तर प्रदेश के दादरी में गुर्जर और मेरठ में जाट सम्मेलनों की गूंज अभी थमी भी नहीं थी कि अब कश्यप-निषाद समाज ने अनुसूचित जाति (SC) का दर्जा देने की मा ...और पढ़ें
Publish Date: Mon, 06 Apr 2026 01:05:40 PM (IST)Updated Date: Mon, 06 Apr 2026 01:22:19 PM (IST)
HighLights
- ‘गुर्जर-निषाद सम्मेलन’ आयोजित
- सामाजिक समीकरण साधने की कोशिश
- ‘निषाद-कश्यप महाकुंभ’ का आयोजन
डिजिटल डेस्क। पश्चिम उत्तर प्रदेश में जातीय राजनीति एक बार फिर नए मोड़ पर पहुंचती नजर आ रही है। दादरी में गुर्जर और मेरठ में जाट सम्मेलनों की गूंज अभी थमी भी नहीं थी कि अब कश्यप-निषाद समाज ने अनुसूचित जाति (SC) का दर्जा देने की मांग उठाकर राजनीतिक हलचल तेज कर दी है।
रविवार को महर्षि कश्यप जयंती के अवसर पर गाजियाबाद के रामलीला मैदान में आयोजित एक बड़े कार्यक्रम में यह मुद्दा प्रमुखता से सामने आया। इस कार्यक्रम का आयोजन प्रदेश सरकार में मंत्री और भाजपा पिछड़ा मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष नरेंद्र कश्यप ने किया, जिसमें उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए।
‘गुर्जर-निषाद सम्मेलन’ आयोजित
इसी के समानांतर, नोएडा के एक इनडोर स्टेडियम में निषाद पार्टी के अध्यक्ष और मंत्री डॉ. संजय निषाद ने ‘गुर्जर-निषाद सम्मेलन’ आयोजित कर अलग राजनीतिक संदेश देने की कोशिश की।
दिलचस्प बात यह रही कि दोनों ही मंचों से कश्यप-निषाद समाज से जुड़ी सात जातियों को अनुसूचित जाति में शामिल करने की मांग जोर-शोर से उठी।
सामाजिक समीकरण साधने की कोशिश
आगामी विधानसभा चुनाव 2027 को ध्यान में रखते हुए सभी राजनीतिक दल अपनी-अपनी रणनीतियों को धार दे रहे हैं। भाजपा की ओर से नरेंद्र कश्यप उन करीब 30 ओबीसी जातियों पर फोकस कर रहे हैं, जिनका वोट बैंक कई सीटों पर निर्णायक भूमिका निभाता है।
‘निषाद-कश्यप महाकुंभ’ का आयोजन
इससे पहले 6 मार्च को भी एक बड़ा निषाद-कश्यप सम्मेलन आयोजित किया गया था, जिसमें विभिन्न राज्यों से लोगों की भागीदारी देखने को मिली थी। उसी कड़ी को आगे बढ़ाते हुए महर्षि कश्यप जयंती पर ‘निषाद-कश्यप महाकुंभ’ का आयोजन किया गया।
नरेंद्र कश्यप का कहना है कि यह प्रयास समाज को उसकी सांस्कृतिक और धार्मिक जड़ों से जोड़ने का है। उनके अनुसार, हम अपने समाज को भावनात्मक रूप से संगठित कर रहे हैं, जिसकी धार्मिक परंपराएं बेहद गहरी हैं।
नई सोशल इंजीनियरिंग की कोशिश
दूसरी ओर, निषाद पार्टी भी पश्चिमी यूपी में अपनी राजनीतिक पकड़ मजबूत करने में जुटी है। गोरखपुर और प्रयागराज के बाद नोएडा में आयोजित ‘गुर्जर-निषाद सम्मेलन’ के जरिए पार्टी ने न केवल SC दर्जे की मांग को और मुखर किया, बल्कि नई सामाजिक साझेदारी (सोशल इंजीनियरिंग) का संकेत भी दिया।
बड़े स्तर पर ऐसे सम्मेलन आयोजित किए जाएंगे
पार्टी अध्यक्ष डॉ. संजय निषाद का कहना है कि गुर्जर और निषाद दोनों ही समुदाय ऐतिहासिक रूप से ‘रक्षक और संघर्षशील’ रहे हैं, इसलिए उनका गठजोड़ स्वाभाविक है। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि आने वाले समय में वाराणसी और बुंदेलखंड में भी बड़े स्तर पर ऐसे सम्मेलन आयोजित किए जाएंगे।