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    UP के स्कूलों में अब कोई बच्चा नहीं रहेगा पीछे, जुलाई से शुरू होगा विशेष ‘कैच-अप शिक्षण’ अभियान, जारी हुए निर्देश

    राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) और नेशनल करिकुलम फ्रेमवर्क (NCFSE) के मानकों को ध्यान में रखते हुए प्रदेश में 'कैच-अप शिक्षण' अभियान का आगाज किया जाएगा।

    By Digital DeskEdited By: Dheeraj Belwal
    Publish Date: Sat, 13 Jun 2026 04:51:31 PM (IST)Updated Date: Sat, 13 Jun 2026 04:51:31 PM (IST)
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    UP के स्कूलों में अब कोई बच्चा नहीं रहेगा पीछे, जुलाई से शुरू होगा विशेष ‘कैच-अप शिक्षण’ अभियान, जारी हुए निर्देश
    जुलाई से लागू होगा नया अकादमिक फॉर्मूला।

    HighLights

    1. यूपी के सरकारी स्कूलों में जुलाई से लागू होगा नया अकादमिक फॉर्मूला
    2. बुनियादी शिक्षा को मजबूत करने के लिए अतिरिक्त कक्षाओं का सहारा
    3. फॉर्मेटिव असेसमेंट से पहचानी जाएगी जरूरत, खेल-खेल में सीखेंगे गणित

    डिजिटल डेस्क। उत्तर प्रदेश के परिषदीय प्राथमिक, उच्च प्राथमिक और कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों (KGBV) में शिक्षा के स्तर को सुधारने और बच्चों की बुनियादी समझ को पुख्ता करने के लिए राज्य सरकार एक नई रणनीतिक शुरुआत करने जा रही है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) और नेशनल करिकुलम फ्रेमवर्क (NCFSE) के मानकों को ध्यान में रखते हुए प्रदेश में 'कैच-अप शिक्षण' अभियान का आगाज किया जाएगा। इस विशेष अभियान का मुख्य उद्देश्य उन छात्र-छात्राओं की मदद करना है, जो नियमित कक्षाओं के बाद भी अपनी कक्षा के अनुरूप अपेक्षित लर्निंग लेवल (सीखने के स्तर) को हासिल नहीं कर पा रहे हैं।

    इस महत्वाकांक्षी योजना को धरातल पर उतारने के लिए बेसिक और माध्यमिक शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव पार्थ सारथी सेन शर्मा ने प्रदेश के सभी जिला बेसिक शिक्षा अधिकारियों (BSAs) और डायट प्राचार्यों को कड़े निर्देश जारी किए हैं।


    अभियान की रूपरेखा और समयसीमा

    यह शैक्षणिक अभियान दो चरणों में चलाया जाएगा, ताकि बच्चों पर बिना मानसिक दबाव डाले उनके लर्निंग गैप को पूरी तरह खत्म किया जा सके:

    • प्रथम चरण (जुलाई): सत्र की शुरुआत में ही सभी विद्यालयों के भीतर 15 दिनों का एक सघन पुनरावृत्ति (रिवीजन) सत्र आयोजित होगा।
    • द्वितीय चरण (अगस्त से जनवरी 2027 तक): इस अवधि के दौरान रोजाना की नियमित कक्षाओं के अलावा बच्चों को प्रतिदिन 20 से 30 मिनट का अतिरिक्त समय देकर उनके कमजोर विषयों को मजबूत किया जाएगा।

    खेल-खेल में होगी पढ़ाई

    अभियान को परिणामोन्मुखी बनाने के लिए पारंपरिक रटने की पद्धति की जगह आधुनिक शिक्षण विधियों को प्राथमिकता दी जाएगी:

    • फॉर्मेटिव मूल्यांकन: कक्षाओं में सबसे पहले बच्चों का रचनात्मक मूल्यांकन (फॉर्मेटिव असेसमेंट) होगा, जिसके जरिए उनकी वास्तविक शैक्षिक स्थिति का पता लगाया जाएगा। इसके बाद बच्चों की जरूरत के अनुसार अलग-अलग समूह बनाकर विशेष लर्निंग प्लान तैयार होगा।
    • रोचक शिक्षण सामग्री का उपयोग: पढ़ाई को बोझिल होने से बचाने के लिए स्कूलों में मौजूद 'बिग बुक', कन्वर्सेशन कार्ड्स, रंग-बिरंगे पोस्टर्स, लाइब्रेरी की किताबों और गणितीय किट (Maths Kit) का अधिकतम इस्तेमाल सुनिश्चित किया जाएगा।
    • सरल से कठिन की ओर: भाषा ज्ञान को बेहतर करने के लिए शिक्षकों को निर्देश दिए गए हैं कि वे पहले दो अक्षरों वाले सरल शब्द सिखाएं, फिर छोटे वाक्य और अंत में बड़े अनुच्छेदों (Paragraphs) की तरफ बढ़ें। वहीं गणित जैसे विषय को पूरी तरह खेल गतिविधियों पर आधारित बनाया जाएगा।
    • सहयोगात्मक तकनीक: कक्षाओं में ग्रुप स्टडी (पीयर लर्निंग) और पार्टनर स्टडी (पेयर लर्निंग) जैसी सामूहिक शिक्षण विधाओं को बढ़ावा दिया जाएगा, ताकि बच्चे एक-दूसरे से सीख सकें। इसके लिए स्किट, रोल प्ले और छोटी प्रतियोगिताओं का सहारा लिया जाएगा।

    गलतियां बनेंगी सीखने का जरिया

    इस पूरी कवायद में बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य और उनके आत्मसम्मान का विशेष ध्यान रखा गया है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि इस अतिरिक्त शिक्षण के दौरान किसी भी बच्चे को 'कमजोर' या 'पिछड़ा हुआ' कहकर संबोधित नहीं किया जाएगा, ताकि उनके भीतर हीन भावना पैदा न हो।

    यह भी पढ़ें- यूपी के 4 लाख आउटसोर्स कर्मचारियों के लिए खुशखबरी, सितंबर से मिल सकता है बढ़ा हुआ मानदेय

    इन अतिरिक्त सत्रों को बच्चों के सामने एक सकारात्मक सहयोग के रूप में पेश किया जाएगा। साथ ही, बच्चों की कॉपियों और कार्य पुस्तिकाओं की नियमित मॉनिटरिंग होगी, जहां उनकी गलतियों पर उन्हें डांटने या दंडित करने के बजाय, उन कमियों को सीखने के एक नए अवसर के रूप में रेखांकित किया जाएगा।