
डिजिटल डेस्क। उत्तर प्रदेश के परिषदीय प्राथमिक, उच्च प्राथमिक और कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों (KGBV) में शिक्षा के स्तर को सुधारने और बच्चों की बुनियादी समझ को पुख्ता करने के लिए राज्य सरकार एक नई रणनीतिक शुरुआत करने जा रही है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) और नेशनल करिकुलम फ्रेमवर्क (NCFSE) के मानकों को ध्यान में रखते हुए प्रदेश में 'कैच-अप शिक्षण' अभियान का आगाज किया जाएगा। इस विशेष अभियान का मुख्य उद्देश्य उन छात्र-छात्राओं की मदद करना है, जो नियमित कक्षाओं के बाद भी अपनी कक्षा के अनुरूप अपेक्षित लर्निंग लेवल (सीखने के स्तर) को हासिल नहीं कर पा रहे हैं।
इस महत्वाकांक्षी योजना को धरातल पर उतारने के लिए बेसिक और माध्यमिक शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव पार्थ सारथी सेन शर्मा ने प्रदेश के सभी जिला बेसिक शिक्षा अधिकारियों (BSAs) और डायट प्राचार्यों को कड़े निर्देश जारी किए हैं।
यह शैक्षणिक अभियान दो चरणों में चलाया जाएगा, ताकि बच्चों पर बिना मानसिक दबाव डाले उनके लर्निंग गैप को पूरी तरह खत्म किया जा सके:
अभियान को परिणामोन्मुखी बनाने के लिए पारंपरिक रटने की पद्धति की जगह आधुनिक शिक्षण विधियों को प्राथमिकता दी जाएगी:
इस पूरी कवायद में बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य और उनके आत्मसम्मान का विशेष ध्यान रखा गया है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि इस अतिरिक्त शिक्षण के दौरान किसी भी बच्चे को 'कमजोर' या 'पिछड़ा हुआ' कहकर संबोधित नहीं किया जाएगा, ताकि उनके भीतर हीन भावना पैदा न हो।
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इन अतिरिक्त सत्रों को बच्चों के सामने एक सकारात्मक सहयोग के रूप में पेश किया जाएगा। साथ ही, बच्चों की कॉपियों और कार्य पुस्तिकाओं की नियमित मॉनिटरिंग होगी, जहां उनकी गलतियों पर उन्हें डांटने या दंडित करने के बजाय, उन कमियों को सीखने के एक नए अवसर के रूप में रेखांकित किया जाएगा।