राहुल गांधी की आय से अधिक संपत्ति का मामला: सीबीआई के हलफनामे पर हाई कोर्ट सख्त, मांगी विस्तृत प्रगति रिपोर्ट
इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने कांग्रेस सांसद और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के खिलाफ कथित आय से अधिक संपत्ति के आरोपों की जांच से जुड...और पढ़ें
Publish Date: Wed, 22 Jul 2026 05:00:34 PM (IST)Updated Date: Wed, 22 Jul 2026 05:02:38 PM (IST)
HighLights
- सीबीआई को नए सिरे से हलफनामा दाखिल करने का निर्देश
- हाई कोर्ट ने केंद्र सरकार के कई विभागों से भी मांगा जवाब
- याचिका में जांच सीबीआई और ईडी से कराने की मांग की गई है
डिजिटल डेस्क, लखनऊ। इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने कांग्रेस सांसद और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के खिलाफ कथित आय से अधिक संपत्ति के आरोपों की जांच से जुड़े मामले में केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) के जवाब पर असंतोष जताया है।
अदालत ने कहा कि एजेंसी द्वारा दाखिल किया गया हलफनामा उसके पूर्व आदेश के अनुरूप नहीं है और इससे शिकायत पर हुई कार्रवाई तथा जांच की वास्तविक स्थिति स्पष्ट नहीं होती।
जांच सीबीआई और ईडी से कराने की मांग
न्यायमूर्ति आर.एस. चौहान और न्यायमूर्ति बी.आर. सिंह की खंडपीठ कर्नाटक निवासी एस. विग्नेश शिशिर की ओर से दायर आपराधिक रिट याचिका पर सुनवाई कर रही है। याचिका में राहुल गांधी के खिलाफ कथित आय से अधिक संपत्ति के मामले की जांच सीबीआई और प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) से कराने की मांग की गई है।
सोमवार को मामले की करीब दो घंटे तक इन-चैंबर सुनवाई हुई। अदालत ने इसे पार्ट-हर्ड (आंशिक रूप से सुना गया मामला) मानते हुए अगली सुनवाई 20 अगस्त को निर्धारित की है।
सीबीआई को नए सिरे से हलफनामा दाखिल करने का निर्देश
सुनवाई के दौरान सीबीआई और ईडी ने अपने-अपने जवाबी हलफनामे पेश किए। सीबीआई के हलफनामे की समीक्षा के बाद अदालत ने पाया कि उसमें शिकायत पर अब तक की कार्रवाई और जांच की प्रगति का पर्याप्त विवरण नहीं है। इस पर कोर्ट ने सीबीआई मुख्यालय, नई दिल्ली के संयुक्त निदेशक अथवा संबंधित जोन प्रमुख को स्वयं शपथपत्र दाखिल कर अगली सुनवाई तक जांच की विस्तृत प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया।
ईडी के जवाब पर अदालत ने जताया संतोष
वहीं, प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के हलफनामे पर अदालत ने संतोष व्यक्त किया। कोर्ट ने कहा कि एजेंसी ने आवश्यक प्रारंभिक कदम उठाए हैं। यदि जांच के दौरान किसी वित्तीय अनियमितता या अवैध गतिविधि से जुड़े साक्ष्य सामने आते हैं, तो ईडी कानून के अनुसार आगे की कार्रवाई करने के लिए स्वतंत्र होगी।
केंद्र के कई विभागों से भी मांगा जवाब
हाई कोर्ट ने केंद्र सरकार के कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (डीओपीटी), वित्त मंत्रालय के राजस्व विभाग, कॉरपोरेट कार्य मंत्रालय तथा गंभीर धोखाधड़ी जांच कार्यालय (एसएफआईओ) को भी चार सप्ताह के भीतर विस्तृत जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है।
इसके अलावा याचिकाकर्ता की ओर से दायर दो अंतरिम प्रार्थना पत्रों पर अदालत ने अगली सुनवाई में विचार करने की बात कही। साथ ही, पूर्व आदेश के अनुरूप मामले से जुड़े सभी अभिलेख वरिष्ठ रजिस्ट्रार की सुरक्षित अभिरक्षा में सीलबंद लिफाफे में रखने के निर्देश भी यथावत बनाए रखे गए हैं।