UP में हाई-टेक होगा गन्ना सर्वेक्षण, 1 मई से शुरू होगा डिजिटल सर्वे, सीधे सर्वर पर दर्ज होगा किसानों का डेटा
उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने चीनी मिलों और गन्ना किसानों के बीच पारदर्शिता बढ़ाने के लिए 'गन्ना सर्वेक्षण नीति 2026-27' की घोषणा कर दी है। ...और पढ़ें
Publish Date: Fri, 24 Apr 2026 05:43:39 PM (IST)Updated Date: Fri, 24 Apr 2026 05:43:39 PM (IST)
30 सितंबर तक करा सकेंगे नया पंजीकरण।HighLights
- GPS सर्वे से मिलेगी सटीक उपज की जानकारी
- 30 सितंबर तक करा सकेंगे नया पंजीकरण
- ₹10 से ₹200 तक तय हुआ पंजीकरण शुल्क
डिजिटल डेस्क। उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने चीनी मिलों और गन्ना किसानों के बीच पारदर्शिता बढ़ाने के लिए 'गन्ना सर्वेक्षण नीति 2026-27' की घोषणा कर दी है। इस नई नीति के तहत अब गन्ने की फसल का आकलन पारंपरिक तरीकों के बजाय GPS (ग्लोबल पोजिशनिंग सिस्टम) के जरिए किया जाएगा। यह हाई-टेक सर्वे 1 मई से शुरू होकर 30 जून 2026 तक संचालित होगा।
सीधे सर्वर पर दर्ज होगा डेटा
गन्ना विकास एवं चीनी उद्योग विभाग ने स्पष्ट किया है कि सर्वेक्षण का कार्य पूरी तरह डिजिटल होगा। सर्वेक्षण दल में एक सरकारी गन्ना पर्यवेक्षक और संबंधित चीनी मिल का एक प्रतिनिधि शामिल होगा।
- SMS अलर्ट: सर्वेक्षण शुरू होने से 3 दिन पहले पंजीकृत किसानों को उनके मोबाइल पर सूचना दी जाएगी।
- मौके पर फीडिंग: टीम किसान के खेत पर पहुंचकर GPS के माध्यम से क्षेत्रफल और फसल की किस्म का डेटा सीधे विभाग के सर्वर पर अपलोड करेगी।
- त्वरित जानकारी: सर्वे पूरा होते ही किसान को उनके खेत के क्षेत्रफल और उपज की जानकारी SMS के जरिए मिल जाएगी।
राजस्व रिकॉर्ड से होगा मिलान
गन्ना आयुक्त वीना कुमारी मीना ने बताया कि पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए सर्वेक्षित भूमि का सत्यापन यूपी भूलेख (upbhulekh.gov.in) वेबसाइट से किया जाएगा। इससे डेटा में गड़बड़ी की गुंजाइश खत्म होगी। चीनी मिलों को निर्देश दिए गए हैं कि वे सर्वेक्षण के अंतिम आंकड़ों को विभागीय पोर्टल के साथ-साथ अपनी आधिकारिक वेबसाइट पर भी प्रदर्शित करें।
नए किसानों के लिए सुनहरा मौका
इस नीति के तहत विभाग न केवल पुराने आंकड़ों को अपडेट करेगा, बल्कि नए किसानों को भी जोड़ने का कार्य करेगा:
- नया पंजीकरण: जो किसान पहली बार गन्ने की आपूर्ति करना चाहते हैं, वे सर्वेक्षण के दौरान अपना पंजीकरण करा सकते हैं।
- अंतिम तिथि: 30 सितंबर 2026 तक पंजीकृत किसानों को ही आगामी पेराई सत्र (2026-27) में गन्ना आपूर्ति की सुविधा मिलेगी।
- उपज बढ़ोतरी का आवेदन: यदि किसी किसान की पैदावार बढ़ी है, तो वह 30 सितंबर तक इसके सुधार के लिए आवेदन कर सकता है।
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पंजीकरण शुल्क का निर्धारण
विभाग ने विभिन्न श्रेणियों के लिए पंजीकरण शुल्क भी तय कर दिया है:
- SC/ST कृषक: ₹10 प्रति किसान
- लघु कृषक: ₹100 प्रति किसान
- अन्य कृषक: ₹200 प्रति किसान
क्यों जरूरी है GPS सर्वेक्षण?
GPS तकनीक के इस्तेमाल से रकबे (क्षेत्रफल) की सटीक माप हो सकेगी, जिससे सट्टा (गन्ना पर्ची) जारी करने में होने वाली धांधली पर रोक लगेगी। सरकार का लक्ष्य है कि वास्तविक किसान को उसकी उपज का सही लाभ मिले और चीनी मिलों को गन्ने की उपलब्धता का सही अनुमान हो।