
डिजिटल डेस्क। राज्य के राजकीय माध्यमिक और बेसिक शिक्षा विभागों में तबादला सत्र समाप्त होने के बाद भी शिक्षकों के स्थानांतरण और समायोजन की प्रक्रिया लगातार लटकी हुई है। जून में प्रारंभ हुई इस कवायद में बार-बार संशोधनों और विभिन्न मामलों के अदालत में पहुंचने की वजह से भारी विलंब हो रहा है। विभाग द्वारा समय-समय पर जारी आदेशों में किए जा रहे बदलावों का सीधा प्रतिकूल असर विद्यालयों के पठन-पाठन और विद्यार्थियों की नियमित शिक्षा व्यवस्था पर देखने को मिल रहा है।
माध्यमिक शिक्षा विभाग ने अपनी प्रचलित स्थानांतरण नीति के तहत सत्र 2026-27 हेतु अधिशेष (सरप्लस) तथा विशेष परिस्थिति वाले शिक्षकों के तबादले किए हैं, जिसके अंतर्गत लगभग 271 सरप्लस अध्यापकों का स्थानांतरण किया गया। दूसरी ओर, बेसिक शिक्षा विभाग में विशेष परिस्थितियों के तहत स्थानांतरण पाने के लिए लगभग छह हजार शिक्षकों ने आवेदन किए हैं। हालांकि, आपत्तियों के निस्तारण और आदेशों में बार-बार हो रहे फेरबदल के कारण प्रक्रिया में निरंतर देरी हो रही है।
शिक्षक संगठनों का आरोप है कि नीति और आदेशों में स्पष्टता न होने से अध्यापकों के बीच अनिश्चितता का माहौल बना हुआ है। कई शिक्षक नवीन तैनाती स्थल को लेकर भ्रम की स्थिति में हैं; कुछ शिक्षक पुराने स्कूलों से कार्यमुक्त होने के इंतजार में हैं तो कई विद्यालयों में नए पदस्थापित शिक्षक अब तक नहीं पहुंचे हैं। इस प्रशासनिक देरी की वजह से कक्षाओं के नियमित संचालन और विषयवार पढ़ाई में व्यवधान उत्पन्न हो रहा है।
शिक्षक प्रतिनिधियों का कहना है कि स्थानांतरण और समायोजन जैसी पूरी प्रक्रिया शैक्षणिक सत्र प्रारंभ होने से पूर्व ही समयबद्ध, पारदर्शी और स्पष्ट नियमों के तहत पूरी की जानी चाहिए। सत्र के बीच में खींचने वाली प्रक्रियाओं और अदालती मुकदमों का सबसे बड़ा खामियाजा छात्र-छात्राओं को भुगतना पड़ता है।
विभागीय अधिकारियों का तर्क है कि अधिकारिक स्तर पर प्रक्रियाओं को शिक्षा के अधिकार अधिनियम (RTE) के मानकों, शिक्षक संगठनों द्वारा दर्ज आपत्तियों तथा माननीय न्यायालय के दिशा-निर्देशों के अनुरूप पूरी तरह पारदर्शी बनाने का प्रयास किया जा रहा है। अधिकारियों के अनुसार, सभी प्राप्त आपत्तियों का शीघ्र निस्तारण कर स्थानांतरण प्रक्रिया को जल्द अंतिम रूप दे दिया जाएगा।