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डिजिटल डेस्क। उत्तर प्रदेश अब धार्मिक पर्यटन को नए स्तर पर ले जाने की तैयारी में है। उत्तर प्रदेश सरकार प्रमुख तीर्थ स्थलों के साथ-साथ कम प्रसिद्ध देवी मंदिरों को जोड़कर एक नया पर्यटन सर्किट विकसित करने जा रही है, जिसे 'शक्ति चक्र' नाम दिया गया है।
सीमावर्ती जिलों के मंदिरों पर नजर
अब तक अयोध्या, वाराणसी और मथुरा जैसे बड़े धार्मिक स्थलों के जरिए प्रदेश पर्यटन के मानचित्र पर चमक रहा था, लेकिन अब सरकार की नजर उन मंदिरों पर है जो सीमावर्ती जिलों में हैं और अभी व्यापक पहचान नहीं बना पाए हैं।
31 जिलों के माता मंदिरों को जोड़ा जाएगा
इस योजना के तहत 31 जिलों के माता मंदिरों को जोड़कर एक विशेष परिपथ तैयार किया जा रहा है। पहले चरण में इन मंदिरों के आसपास बुनियादी सुविधाओं पर काम किया जा रहा है, जैसे सड़क संपर्क बेहतर करना, साफ-सफाई, प्रकाश व्यवस्था, पेयजल, पार्किंग और पर्यटक सूचना केंद्र विकसित करना।
एक साथ जोड़कर ‘शक्ति चक्र’बनेगा
इसके बाद दूसरे चरण में इन सभी स्थलों को एक साथ जोड़कर ‘शक्ति चक्र’ के रूप में देश-विदेश में प्रमोट किया जाएगा। इसके लिए डिजिटल प्लेटफॉर्म, पर्यटन मेले और धार्मिक आयोजनों का सहारा लिया जाएगा, ताकि अधिक से अधिक श्रद्धालु यहां तक पहुंच सकें।
पर्यटन मंत्री जयवीर सिंह के मुताबिक, इस पहल का मकसद कम प्रसिद्ध शक्तिपीठों और देवी स्थलों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाना है। साथ ही इससे स्थानीय रोजगार, हस्तशिल्प और क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था को भी बढ़ावा मिलेगा।
इन जिलों को किया जाएगा शामिल
इस प्रस्तावित सर्किट में सहारनपुर का प्रसिद्ध शाकुंभरी देवी शक्तिपीठ समेत बिजनौर, मुरादाबाद, बरेली, पीलीभीत, लखीमपुर खीरी, बहराइच, सिद्धार्थनगर, बलरामपुर, देवरिया, बलिया, गाजीपुर, चंदौली, मीरजापुर, प्रयागराज, बांदा, झांसी, ललितपुर, जालौन, इटावा, आगरा, मथुरा, अलीगढ़, गौतमबुद्धनगर, गाजियाबाद और शामली जैसे जिलों के कई प्रमुख देवी मंदिर शामिल किए गए हैं।
विशेष टूर पैकेज
सरकार की योजना है कि जैसे बड़े धार्मिक स्थलों के लिए विशेष टूर पैकेज बनाए जाते हैं, वैसे ही ‘शक्ति चक्र’ के लिए भी पैकेज तैयार किए जाएं, जिससे श्रद्धालुओं को एक ही सर्किट में कई शक्तिपीठों के दर्शन का अवसर मिल सके।
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