
डिजिटल डेस्क। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने अपनी तीन दिवसीय चीन यात्रा (Trump China Visit) के बाद बड़ा दावा करते हुए कहा कि अमेरिका और चीन इस बात पर सहमत हैं कि ईरान के पास परमाणु हथियार नहीं होने चाहिए। इसके साथ ही दोनों देशों ने रणनीतिक रूप से अहम होर्मुज स्ट्रेट (Iran Conflict) को हर हाल में खुला रखने पर भी सहमति जताई है। ट्रंप ने यह बयान चीन से रवाना होने के बाद एयर फोर्स वन में पत्रकारों से बातचीत के दौरान दिया।
डोनल्ड ट्रंप 13 मई से 15 मई तक चीन के आधिकारिक दौरे पर थे। इस दौरान उन्होंने चीनी राष्ट्रपति शी चिनफिंग के साथ द्विपक्षीय व्यापार, मध्य-पूर्व के हालात, ताइवान और वैश्विक सुरक्षा जैसे कई अहम मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की।
पत्रकारों से बातचीत के दौरान ट्रंप ने कहा कि होर्मुज स्ट्रेट पर अमेरिका का नियंत्रण बना हुआ है और यह क्षेत्र वैश्विक व्यापार तथा ऊर्जा आपूर्ति के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण है। उन्होंने दावा किया कि अमेरिकी नौसैनिक नाकेबंदी के कारण पिछले ढाई हफ्तों में ईरान को प्रतिदिन लगभग 500 मिलियन डॉलर का नुकसान हुआ है।
ट्रंप ने कहा कि चीन भी इस बात से सहमत है कि होर्मुज स्ट्रेट को खुला रखना जरूरी है। उनका कहना था कि इस समुद्री मार्ग के बंद होने से वैश्विक व्यापार और तेल आपूर्ति पर गंभीर असर पड़ सकता है।
ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर ट्रंप ने कहा कि राष्ट्रपति शी चिनफिंग ने भी इस बात पर जोर दिया कि ईरान के पास परमाणु हथियार नहीं होने चाहिए। ट्रंप के अनुसार, इस मुद्दे पर दोनों देशों के बीच स्पष्ट समझ बनी है। उन्होंने कहा,
“ईरान के पास परमाणु हथियार नहीं हो सकते। इस बात पर बहुत जोर दिया गया और यह भी कहा गया कि होर्मुज स्ट्रेट को खुला रखा जाना चाहिए।”
ट्रंप ने यह भी कहा कि उनके मन में चीनी राष्ट्रपति के लिए काफी सम्मान है और दोनों नेताओं के बीच कई संवेदनशील अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर गंभीर चर्चा हुई।
ट्रंप ने बातचीत के दौरान ताइवान के मुद्दे का भी उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि चीनी राष्ट्रपति शी चिनफिंग ताइवान में किसी प्रकार का स्वतंत्रता संघर्ष नहीं देखना चाहते क्योंकि इससे बड़ा टकराव पैदा हो सकता है।
ट्रंप के मुताबिक, चिनफिंग ने स्पष्ट रूप से कहा कि वे ताइवान की गतिविधियों के सख्त खिलाफ हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा कि उन्होंने चीनी राष्ट्रपति की बातों को ध्यान से सुना और इस मुद्दे पर अपनी ओर से कोई टिप्पणी नहीं की।
उन्होंने कहा, “राष्ट्रपति चिनफिंग और मैंने ताइवान के बारे में बहुत बात की। उनका मानना है कि ताइवान जो कुछ भी कर रहा है, उससे उनका कोई लेना-देना नहीं होना चाहिए। वे ताइवान की गतिविधियों के सख्त खिलाफ हैं।”
ट्रंप ने दावा किया कि ताइवान और ईरान दोनों मुद्दों पर अमेरिका और चीन के बीच अच्छी समझ बनी है। उन्होंने कहा कि दोनों देशों ने इन विषयों पर विस्तार से चर्चा की और क्षेत्रीय स्थिरता बनाए रखने पर सहमति जताई।
#WATCH | As he returns to Washington, DC after his visit to Beijing, China, US President Donald Trump says, "...That was a great success. It was fantastic. We made great deals, we have a great relationship. A lot of things have happened that you will be hearing about. But that… pic.twitter.com/qq87G5Hxau
— ANI (@ANI) May 16, 2026
अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा कि ताइवान में किसी भी प्रकार का संघर्ष बेहद गंभीर स्थिति पैदा कर सकता है और चीन इस तरह की परिस्थिति नहीं चाहता। उन्होंने कहा कि उन्होंने शी चिनफिंग की बातों को गंभीरता से सुना।
एयर फोर्स वन में हुई प्रेस वार्ता के दौरान ट्रंप से 1982 में तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति रोनाल्ड रीगन द्वारा दिए गए आश्वासनों को लेकर सवाल पूछा गया। सवाल यह था कि क्या अमेरिका ताइवान को हथियारों की बिक्री के मामले में चीन से सलाह लेगा।
इसके जवाब में ट्रंप ने कहा कि 1982 की बातें अब काफी पुरानी हो चुकी हैं। उन्होंने कहा कि इस मुद्दे को बातचीत के दौरान चीनी राष्ट्रपति ने उठाया था और दोनों नेताओं के बीच हथियारों की बिक्री पर भी चर्चा हुई।
ट्रंप ने कहा, “हमने ताइवान के मुद्दे पर काफी विस्तार से बात की। मैंने इस विषय पर कोई अंतिम फैसला नहीं लिया है, लेकिन जल्द ही इस पर निर्णय लूंगा।”
उन्होंने यह भी कहा कि अंतरराष्ट्रीय हालात तेजी से बदल रहे हैं और ऐसे में पुराने समझौतों को उसी संदर्भ में देखना चाहिए।
ग्राउंड रिपोर्ट्स के मुताबिक, स्वदेश लौटने की तैयारी के बीच अमेरिकी टीम ने उन सभी चीजों को एक जगह इकट्ठा किया जो उन्हें चीनी मेजबानों से भेंट स्वरूप मिली थीं। इनमें वाइट हाउस के कर्मचारियों को इस्तेमाल के लिए दिए गए खास बर्नर फोन, डेलिगेशन पिन और क्रेडेंशियल्स जैसी कई अन्य चीजें शामिल थीं।
सुरक्षा के मद्देनजर इन सभी सामानों को अमेरिका ले जाने के बजाय, उड़ान भरने से ठीक पहले कूड़ेदान में फेंक दिया गया या पूरी तरह नष्ट कर दिया गया।