
डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। IIT कानपुर की डिग्री और 20 साल का अनुभव... अमेरिका में रहे भारतीय मूल के एक शख्स के लिए बेकार साबित हो रहा है। वह बीते 2 साल से अमेरिका (United State of America) में फुल टाइम जॉब खोज रहा है, पर सफल नहीं हो सका है।
बड़ी बात है कि भारतीय मूल का शख्स 2024 में अमेरिका के डलास (Dallas) में एक IT कंपनी में सॉफ्टवेयर इंजीनियर रहा है। उसने वहां की IT इंडस्ट्री में दो दशक से ज्यादा समय तक काम किया है, पर आज वह नौकरी के लिए दर-दर भटक रहा है। हालात ऐसे आ गए हैं कि उसको घर का किराया भरना मुश्किल हो रहा है।
देव गौतम (61) ने IIT कानपुर से फिजिक्स में M.Sc. की है। फिर उन्होंने अमेरिका की Stony Brook University से PhD पूरी की। इसके बाद देव ने अलग-अलग IT कंपनियों में 20 साल से ज्यादा तक काम किया। पर उनके जीवन में साल 2024 के सितंबर महीने में उस वक्त नया मोड़ आया, जब डलास (Dallas) में एक IT कंपनी में सॉफ्टवेयर इंजीनियर थे और उन्हें बताया गया कि उनकी नौकरी बची रहे, इसके लिए उन्हें दूसरे स्टेट में जाना होगा।
इस पर उन्होंने दूसरे स्टेट में जाने से इनकार करते हुए नौकरी छोड़ दी। साथ ही वह दूसरी कंपनी में जॉब तलाशने लगे। Business Insider की रिपोर्ट के अनुसार, देव गौतम ने बताया कि नौकरी छोड़ने का फैसला उनके लिए काफी बुरा साबित हुआ। उन्होंने दूसरी नौकरी पाने के लिए काफी मेहनत की। पर 2 साल बाद भी उन्हें फुल टाइम नौकरी नहीं मिल पाई।
IITian देव ने LinkedIn पर नौकरी के लिए अप्लाई किया। कई अन्य लोगों से बात भी की। कुछ कंपनियों में वह कई बार इंटरव्यू के लिए गए, लेकिन उधर से खाली हाथ लौट आए।
जब उन्हें अपनी उम्र, काम में लंबे गैप और IT इंडस्ट्री के हालात को देखकर समझ आया कि दूसरी नौकरी मिलने की उम्मीद कम ही है तो उन्होंने नौकरी के लिए अप्लाई भी करना लगभग बंद कर दिया। देव ने बताया कि कुछ समय उन्होंने थोड़ी कमाई करने के लिए 'डे ट्रेडिंग' की कोशिश की, पर उससे भी कुछ खास हासिल नहीं हो सका। जब हालात ज्यादा बिगड़ गए तो उन्होंने Uber, DoorDash और Walmart Spark जैसे प्लेटफॉर्म के जरिए छोटा-मोटा काम करना शुरू किया।
देव का कहना है कि जो कुछ उनके पास पैसे थे, वे नौकरी की तलाश में खत्म हो गए। अब उनको बिल भरना मुश्किल हो गया। क्रेडिट कार्ड से लोन तक लेना पड़ा। IITian देव ने बताया कि डलास में उनके घर का किराया ज्यादा है, इसलिए वह दूसरी जगह शिफ्ट होना चाहते हैं, पर इसमें भी बड़ी मुसीबत है।
अगर उन्होंने कोई दूसरा अपार्टमेंट किराए पर लेने की कोशिश की, तो मकान मालिक नौकरी और इनकम का प्रूफ मांगेगा, जोकि संभव नहीं लगता। जब हर तरफ से रास्ता बंद होता नजर आया तो देव ने जनवरी में GoFundMe शुरू किया, जिससे उन्हें $9,000 मिले, जो बिल भरने में ही खर्च हो गए। अब लोगों से पैसे मांगना भी मुश्किल है।
देव फिलहाल छोटा-मोटा काम करके अपना खर्च चला रहे हैं। उनका कहना है कि जनवरी में जब वह 62 साल के हो जाएंगे तो सोशल सिक्योरिटी पाने के लिए एलिजिबल हो जाएंगे, जिससे उनकी जिंदगी थोड़ी और आसान हो जाएगी। देव ने बताया कि उन्होंने भारत वापस आने के बारे में भी सोचा है, लेकिन वह ऐसा करने की जल्दी में नहीं हैं। भारत वापस आने का फैसला लेने में कुछ समय लगेगा।