
डिजिटल डेस्क। आज के दौर में जब हम एलन मस्क या जेफ बेजोस की दौलत की चर्चा करते हैं, तो 18वीं सदी के भारत के जगत सेठ के सामने ये आंकड़े भी बौने नजर आते हैं। आधुनिक अर्थशास्त्रियों के अनुमान के अनुसार, इस परिवार की कुल संपत्ति आज के मूल्य में करीब $100 बिलियन (8.3 लाख करोड़ रुपये) से अधिक थी। यह वह दौर था जब दुनिया की कुल जीडीपी (GDP) का करीब 25% हिस्सा अकेले भारत से आता था और उसका एक बड़ा हिस्सा इस अकेले परिवार के नियंत्रण में था।
जगत सेठ परिवार की शक्ति का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि उनकी तुलना उस दौर के 'बैंक ऑफ इंग्लैंड' से की जाती थी।
इस साम्राज्य की नींव पटना के माणिक चंद ने रखी थी, लेकिन इसे वैश्विक पहचान उनके दत्तक पुत्र फतेह चंद ने दिलाई। 1712 में दिल्ली के मुगल बादशाह फर्रुखसियर ने उन्हें 'नागर सेठ' कहा, लेकिन बाद में उनकी अकूत संपत्ति और प्रभाव को देखते हुए उन्हें 'जगत सेठ' यानी 'दुनिया का सेठ' की उपाधि दी गई।
जगत सेठ केवल बैंकर नहीं, बल्कि राजनीति के सबसे बड़े खिलाड़ी थे। इतिहासकार रॉबर्ट ओर्मे के अनुसार, मुर्शिदाबाद की सत्ता किसके हाथ में होगी, यह जगत सेठ तय करते थे।
प्लासी का युद्ध (1757): नवाब सिराजुद्दौला के साथ मनमुटाव के बाद, जगत सेठों ने रॉबर्ट क्लाइव और अंग्रेजों का साथ देने का फैसला किया। यह एक ऐसा ऐतिहासिक मोड़ था जिसने न केवल बंगाल, बल्कि पूरी दुनिया का नक्शा बदल दिया और ब्रिटिश साम्राज्य की नींव मजबूत की।
प्लासी के युद्ध के बाद इस परिवार का पतन भी उतनी ही तेजी से हुआ। ब्रिटिश कंपनी ने व्यापार पर एकाधिकार कर लिया और जगत सेठों का भारी कर्ज कभी नहीं लौटाया।
कंगालियत का दौर: 1857 के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम के बाद यह परिवार पूरी तरह बिखर गया। ब्रिटिश सत्ता के विस्तार ने उनके बैंकिंग मॉडल को ध्वस्त कर दिया।
कहां हैं वंशज?: यह इतिहास की सबसे बड़ी विडंबना है कि जो परिवार दुनिया को उधार देता था, उसके वंशज 20वीं सदी की शुरुआत तक गुमनामी के अंधेरे में खो गए। आज उनके वास्तविक उत्तराधिकारियों के बारे में कोई पुख्ता जानकारी उपलब्ध नहीं है।
पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद में हजादुआरी पैलेस के पास स्थित उनका कभी भव्य रहा महल अब एक संग्रहालय (Museum) है। यहां पर्यटक उनकी विलासिता और उस दौर के बैंकिंग उपकरणों की झलक देख सकते हैं, जो याद दिलाते हैं कि कभी कोई भारतीय परिवार वैश्विक अर्थव्यवस्था का रिमोट कंट्रोल अपने हाथ में रखता था।
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