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    आतंकवाद की कीमत चुका रहा पाकिस्तान! सिंध-बलूचिस्तान में पानी की भारी किल्लत, एक-तिहाई आबादी प्रभावित

    पाकिस्तान की कृषि अर्थव्यवस्था के लिए रीढ़ माना जाने वाला सुक्कुर बैराज सिस्टम पानी की भारी किल्लत से जूझ रहा है। आंकड़ों के मुताबिक, सिंध की प्रमुख न...और पढ़ें

    By Digital DeskEdited By: Mohan Kumar
    Publish Date: Sat, 13 Jun 2026 02:24:36 PM (IST)Updated Date: Sat, 13 Jun 2026 02:24:36 PM (IST)
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    आतंकवाद की कीमत चुका रहा पाकिस्तान! सिंध-बलूचिस्तान में पानी की भारी किल्लत, एक-तिहाई आबादी प्रभावित
    सिंधु जल संधि पर रोक के बाद पाकिस्तान में पानी की किल्लत।

    HighLights

    1. पानी की किल्लत से पाकिस्तान की कृषि अर्थव्यवस्था की रीढ़ टूटी
    2. सुक्कुर बैराज की नहरें सूखीं, चावल निर्यात ठप होने की कगार पर
    3. दांव पर लगी पाकिस्तान की एक-तिहाई आबादी की आजीविका

    डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। पाकिस्तान प्रायोजित पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत द्वारा दशकों पुरानी 'सिंधु जल संधि' को रोके जाने से पाकिस्तान गहरे जल संकट में घिर गया है। नई दिल्ली के इस कूटनीतिक कदम के बाद सिंध और बलूचिस्तान के कृषि क्षेत्रों में आर्थिक तबाही का खतरा मंडरा रहा है।

    यह संकट पाकिस्तान की लगभग एक-तिहाई आबादी को प्रभावित कर रहा है। भारत के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने साफ कर दिया है कि आतंकवाद और द्विपक्षीय संबंध एक साथ नहीं चल सकते, और मानवता के दुश्मनों तक सिंधु का पानी नहीं पहुंचने दिया जाएगा।


    नहरें सूखीं, सिंध को भारी नुकसान

    पाकिस्तानी अखबार 'डॉन' के अनुसार, पाकिस्तान की कृषि अर्थव्यवस्था के लिए रीढ़ माना जाने वाला सुक्कुर बैराज सिस्टम पानी की भारी किल्लत से जूझ रहा है। आंकड़ों के मुताबिक, सिंध की प्रमुख नहरों में पानी का स्तर चिंताजनक रूप से गिर गया है, जहां दादू नहर में 82%, नॉर्थ वेस्ट नहर में 64.1% और राइस नहर में 38% की भारी कमी दर्ज की गई है।

    पंजाब पर पानी चोरी के आरोप

    इस संकट के बीच पाकिस्तान के भीतर ही राजनीतिक और क्षेत्रीय विवाद गहरा गया है। सिंध के सिंचाई विभाग का आरोप है कि पंजाब प्रांत अपने तय हिस्से (44,000 क्यूसेक) से 21% अधिक यानी 53,394 क्यूसेक पानी ले रहा है। इसी तरह टौंसा बैराज में भी निर्धारित कोटे से अधिक पानी रोका जा रहा है, जिससे निचले इलाकों सिंध और बलूचिस्तान तक पानी नहीं पहुंच पा रहा है।

    यह भी पढ़ें- ईरान-अमेरिका में तनाव चरम पर, अमेरिकी हमले में तबाह हुए पानी के जलाशय, 50 डिग्री गर्मी में बूंद-बूंद को तरसे हजारों लोग

    पीपीपी सिंध के अध्यक्ष निसार अहमद खुहरो ने इसे सिंध का 'आर्थिक नरसंहार' करार दिया है। उन्होंने चेतावनी दी कि सिंध देश के कुल कृषि उत्पादन का 67% हिस्सा पैदा करता है और अकेले चावल निर्यात से 1.4 अरब डॉलर कमाता है। पानी न मिलने से अब किसानों की आजीविका और देश की अर्थव्यवस्था पूरी तरह दांव पर लग गई है।