
डिजिटल डेस्क। पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष ने पूरे क्षेत्र को गहरे संकट में डाल दिया है। Iran, United States और Israel के बीच करीब 40 दिनों तक चले इस युद्ध ने भारी तबाही मचाई। हालांकि सीजफायर की घोषणा हो चुकी है, लेकिन हालात अभी भी पूरी तरह सामान्य नहीं हुए हैं और छिटपुट हमले जारी हैं।
अनुमानों के मुताबिक इस दौरान करीब 43 हजार मिसाइल, ड्रोन और बम हमले हुए, जिनमें 8,700 से ज्यादा लोगों की मौत हुई और 40 हजार से अधिक लोग घायल हुए। इस संघर्ष का असर सीधे तौर पर 17 देशों पर पड़ा है।
वैश्विक अर्थव्यवस्था पर भारी चोट
युद्ध का असर सिर्फ सीमाओं तक सीमित नहीं रहा, बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था भी हिल गई। कुल आर्थिक नुकसान करीब 40 लाख करोड़ रुपये तक पहुंचने का अनुमान है। China, Japan और South Korea जैसी अर्थव्यवस्थाओं पर दबाव बढ़ गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि प्रभावित देशों को संभलने में 1-2 साल लग सकते हैं, जबकि पूरी तरह पुनर्निर्माण में 20-30 साल तक का समय लग सकता है।
ईरान की रणनीति अब भी मजबूत
सीजफायर के बावजूद Iran की सैन्य रणनीति चर्चा में है। माना जा रहा है कि उसके 10-20% मिसाइल लॉन्चर अभी भी सक्रिय हैं। ईरान ने अपने हथियारों और लॉन्च सिस्टम को इस तरह छिपाकर रखा है कि वह जरूरत पड़ने पर अचानक हमला कर सकता है। यह “लचीली युद्ध रणनीति” उसे लंबे समय तक संघर्ष में बनाए रखने में मदद कर रही है।
आम लोगों की जिंदगी तबाह
युद्ध का सबसे ज्यादा असर आम नागरिकों पर पड़ा है। घर, स्कूल और बुनियादी ढांचा बुरी तरह प्रभावित हुआ है। लाखों लोग अपने घरों से बेघर हो गए हैं और रोजमर्रा की जिंदगी पूरी तरह अस्त-व्यस्त हो गई है।
ईरान को अकेले करीब 13 लाख करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है और उसकी जीडीपी में 20% तक गिरावट की आशंका जताई जा रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि देश को दोबारा खड़ा होने में कम से कम एक दशक लग सकता है।
अमेरिका को भी भारी कीमत
United States को भी इस युद्ध में बड़ा नुकसान उठाना पड़ा है। कई सैनिक मारे गए और सैकड़ों घायल हुए। महंगे लड़ाकू विमानों और ड्रोन का इस्तेमाल कर सस्ते हमलों को रोकना अमेरिका के लिए आर्थिक रूप से भारी साबित हुआ। अरब देशों में मौजूद कई सैन्य ठिकानों को भी नुकसान पहुंचा है।
ट्रंप पर बढ़ा दबाव
इस बीच Donald Trump के कुछ विवादित बयानों को लेकर राजनीतिक विवाद भी बढ़ गया है। 70 से ज्यादा डेमोक्रेट सांसद उनके खिलाफ कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। Antonio Guterres ने भी नागरिकों को निशाना बनाने की धमकियों की आलोचना की है।
होर्मुज में बदली खेल की दिशा
Strait of Hormuz पर नियंत्रण का इस्तेमाल करते हुए ईरान ने कुछ जहाजों से टोल शुल्क चीनी मुद्रा में वसूलना शुरू कर दिया है। यह कदम अमेरिकी डॉलर के प्रभुत्व को चुनौती देने के रूप में देखा जा रहा है और China के साथ मिलकर वैकल्पिक व्यापार व्यवस्था बनाने की कोशिश मानी जा रही है।
नैरेटिव की जंग भी जारी
सिर्फ हथियारों से नहीं, बल्कि विचारों और मीडिया के जरिए भी यह संघर्ष जारी है। ईरान के क्रिएटर्स वैश्विक स्तर पर अपने पक्ष को मजबूत करने के लिए डिजिटल प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल कर रहे हैं।
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