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    ईरान-अमेरिका समझौता: $300 अरब के निवेश और समुद्री नाकाबंदी हटाने पर छिड़ा विवाद, जानें क्या है नया मसौदा

    Iran-US Draft: न्यूयॉर्क टाइम्स का दावा किया है कि ईरान में अमेरिकी कंपनियों की एंट्री और होर्मुज जलडमरूमध्य खोलने की शर्तों पर सस्पेंस बरकरार।

    By Digital DeskEdited By: Akash Sharma
    Publish Date: Fri, 29 May 2026 08:47:49 AM (IST)Updated Date: Fri, 29 May 2026 08:47:49 AM (IST)
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    ईरान-अमेरिका समझौता: $300 अरब के निवेश और समुद्री नाकाबंदी हटाने पर छिड़ा विवाद, जानें क्या है नया मसौदा
    अमेरिका-ईरान के बीच संभावित कूटनीतिक समझौते का मसौदा

    HighLights

    1. नाकाबंदी हटाने की समय-सीमा पर दोनों देश असहमत
    2. व्यापारिक मार्ग से समुद्री बारूदी सुरंगें हटाने का लक्ष्य
    3. प्रत्यक्ष बातचीत न होने से समझौतों में अनिश्चितता

    डिजिटल डेस्क। अमेरिका और ईरान के बीच लंबे समय से जारी कूटनीतिक गतिरोध को समाप्त करने के लिए एक नए समझौते के मसौदे पर चर्चा तेज हो गई है। न्यूयॉर्क टाइम्स की एक हालिया रिपोर्ट के अनुसार, इस संभावित समझौते में सबसे चौंकाने वाला पहलू ईरान के लिए एक विशाल निवेश कोष की स्थापना का प्रस्ताव है। हालांकि, कूटनीतिक गलियारों से आ रही खबरें बताती हैं कि दोनों पक्ष समझौते के करीब होने के बावजूद कई जटिल मुद्दों और शर्तों पर पूरी तरह बंटे हुए हैं।

    $300 अरब का पुनर्निर्माण कार्यक्रम और अमेरिकी निवेश

    एक ईरानी अधिकारी ने न्यूयॉर्क टाइम्स को बताया कि अमेरिका अंतिम समझौते पर हस्ताक्षर होने की स्थिति में ईरान के लिए 300 अरब डॉलर के "पुनर्निर्माण कार्यक्रम" की स्थापना करने पर सहमत होगा। दूसरी तरफ, इस नवीनतम मसौदे की जानकारी रखने वाले अमेरिकी राजनयिकों ने इसे एक अंतरराष्ट्रीय "निवेश कोष" करार दिया है।


    न्यूयॉर्क टाइम्स के अनुसार, अमेरिकी पक्ष का कहना है कि वे इस कोष को केवल "सुविधा प्रदान करने में मदद करेंगे" और इस योजना पर बातचीत की अवधि के दौरान आगे चर्चा की जाएगी। रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान ने प्रस्ताव दिया है कि इस समझौते के तहत प्रमुख तेल और ऊर्जा निगमों सहित अमेरिकी कंपनियों को ईरान में निवेश और संयुक्त उद्यमों (Joint Ventures) के लिए प्रवेश की अनुमति दी जा सकती है।

    The US and Iran reached an agreement to extend their ceasefire and lift restrictions on shipping through the Strait of Hormuz, though US President Trump has yet to approve it https://t.co/UhuD2YNKYk pic.twitter.com/AAMHLYzSyi

    — Reuters (@Reuters) May 29, 2026

    मध्यस्थों की भूमिका और नेतृत्व का सस्पेंस

    इस पूरी वार्ता में सबसे बड़ी जटिलता यह है कि अधिकांश बातचीत सीधे न होकर कतरी और पाकिस्तानी मध्यस्थों के माध्यम से हुई है। इस वजह से अमेरिकी राजनयिकों के लिए यह स्पष्ट नहीं है कि दोनों पक्ष एक ही तरह के ज्ञापन (Memorandum) पर काम कर रहे हैं या नहीं। इसके अतिरिक्त, अमेरिकी पक्ष इस बात को लेकर भी आश्वस्त नहीं है कि ईरान में वास्तव में किसके पास इस अंतिम समझौते पर हस्ताक्षर करने का वास्तविक अधिकार है।

    युद्ध विराम और शत्रुता की समाप्ति पर अलग-अलग दावे

    समझौते की शर्तों को लेकर भी दोनों पक्षों के बयानों में भारी अंतर है। अमेरिकी राजनयिकों के अनुसार, प्रारंभिक मसौदे में शुरुआती 60 दिनों के लिए शत्रुता समाप्त करने का प्रावधान था ताकि आगे की बातचीत का रास्ता साफ हो सके। इसके विपरीत, ईरानी अधिकारी के दावे के अनुसार, शर्तों के तहत बातचीत की पूरी अवधि के दौरान लेबनान सहित सभी मोर्चों पर "युद्ध समाप्ति की घोषणा" शामिल थी। ईरानियों का यह भी मानना है कि यह समझौता ज्ञापन केवल एक व्यापक और स्थायी समझौते के लिए चल रही बातचीत की अवधि तक ही सीमित है।

    होर्मुज जलडमरूमध्य और समुद्री नाकाबंदी का मुद्दा

    इस समझौते का एक अन्य महत्वपूर्ण हिस्सा होर्मुज जलडमरूमध्य से वाणिज्यिक जहाजों की निर्बाध आवाजाही बहाल करना है, जहां से शांति काल में दुनिया का लगभग पांचवां हिस्सा तेल और गैस गुजरता है। अमेरिकी योजना के मुताबिक, उनकी समुद्री नाकाबंदी जारी रहेगी, लेकिन ईरान द्वारा युद्ध-पूर्व स्तर के यातायात को बहाल करने और जलडमरूमध्य से जल्द से जल्द बारूदी सुरंगें हटाने के आधार पर इसे चरणबद्ध तरीके से कम किया जाएगा। इसके उलट, ईरानी अधिकारी का दावा है कि अमेरिका 30 दिनों के भीतर नाकाबंदी पूरी तरह हटा लेगा, जबकि अमेरिकी अधिकारियों ने ऐसी किसी भी समय-सीमा की पुष्टि नहीं की है।