अमेरिका-ईरान सीजफायर में पाकिस्तान के पीएम के दावे पर अमेरिकी उपराष्ट्रपति का बड़ा बयान, पाक की हुई किरकिरी
अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने स्पष्ट किया है कि लेबनान, अमेरिका और ईरान के बीच जारी संघर्ष-विराम वार्ता का हिस्सा नहीं है। ...और पढ़ें
Publish Date: Thu, 09 Apr 2026 02:37:11 PM (IST)Updated Date: Thu, 09 Apr 2026 02:40:30 PM (IST)
अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस। फाइल फोटोHighLights
- हमने कभी ऐसा कोई वादा नहीं किया
- हमारा ध्यान केवल हमारे सहयोगियों पर केंद्रित
- शहबाज शरीफ के दावे पर खड़े हुए सवाल
डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने स्पष्ट किया है कि लेबनान, अमेरिका और ईरान के बीच जारी संघर्ष-विराम वार्ता का हिस्सा नहीं है। उनका यह बयान ऐसे समय में आया है जब दोनों देशों के बीच अस्थायी सीजफायर लागू हुआ है।
हंगरी से रवाना होने से पहले पत्रकारों से बातचीत में वेंस ने कहा कि अमेरिका ने कभी भी लेबनान को शांति प्रस्ताव में शामिल करने का कोई वादा या संकेत नहीं दिया।
हमने कभी ऐसा कोई वादा नहीं किया
जेडी वेंस ने जोर देकर कहा कि इस संघर्ष-विराम का मुख्य फोकस ईरान और अमेरिका के सहयोगी देशों विशेष रूप से इजरायल और खाड़ी के अरब राष्ट्रों की सुरक्षा और स्थिरता पर है। वेंस ने कहा, हमने कभी ऐसा कोई वादा नहीं किया और न ही ऐसा संकेत दिया। हमारा ध्यान केवल ईरान और हमारे सहयोगियों पर केंद्रित था।
शहबाज शरीफ के दावे पर खड़े हुए सवाल
वेंस के इस बयान से पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ के उस दावे पर सवाल खड़े हो गए हैं, जिसमें उन्होंने कहा था कि लेबनान भी शांति समझौते का हिस्सा है। इस दावे को पहले ही अमेरिका के राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप और इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू खारिज कर चुके हैं।
पाकिस्तान की भूमिका उतनी स्वतंत्र नहीं थीः रिपोर्ट
इस बीच, 'फाइनेंशियल टाइम्स' की एक रिपोर्ट में दावा किया गया है कि अमेरिका और ईरान के बीच संघर्ष-विराम की पहल में पाकिस्तान की भूमिका उतनी स्वतंत्र नहीं थी, जितनी दिखाई गई। रिपोर्ट के मुताबिक, व्हाइट हाउस ने ही इस्लामाबाद को ईरान के साथ अस्थायी समझौता कराने के लिए आगे बढ़ाया था।
पाकिस्तान की कूटनीतिक स्थिति पर गंभीर सवाल
रिपोर्ट में यह भी संकेत दिया गया है कि पाकिस्तान ने खुद को एक निष्पक्ष मध्यस्थ के रूप में पेश किया, लेकिन वास्तविकता में वह अमेरिकी रणनीति का हिस्सा बनकर काम कर रहा था। इससे पाकिस्तान की स्वतंत्र कूटनीतिक स्थिति पर गंभीर सवाल उठने लगे हैं।