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माउंट एवरेस्ट पर खुम्बु ग्लेशियर को पिघला रहा इंसानों का पेशाब, हर साल 2500 टन बर्फ बन रही पानी

दुनिया की सबसे ऊंची चोटी माउंट एवरेस्ट पर बढ़ती इंसानी गतिविधियों और ग्लोबल वार्मिंग की वजह से खुम्बु ग्लेशियर तेजी से पिघल रहा है।

By Digital DeskEdited By: Nitin Kumar
Publish Date: Sun, 06 Sep 2026 02:16:17 PM (IST)Updated Date: Sun, 06 Sep 2026 02:52:36 PM (IST)
माउंट एवरेस्ट पर खुम्बु ग्लेशियर को पिघला रहा इंसानों का पेशाब, हर साल 2500 टन बर्फ बन रही पानी
तेजी से पिघल रहा खुम्बु ग्लेशियर

HighLights

  1. तेजी से पिघल रहा खुम्बु ग्लेशियर
  2. इंसानी पेशाब माना जा रहा वजह
  3. एवरेस्ट पर हर साल लगते हैं 1600 टेंट

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। दुनिया की सबसे ऊंची चोटी माउंट एवरेस्ट पर बढ़ती इंसानी गतिविधियों और ग्लोबल वार्मिंग की वजह से खुम्बु ग्लेशियर तेजी से पिघल रहा है। इसके पीछे की बड़ी वजह इंसानी पेशाब को माना जा रहा है, इससे आगामी समय में बड़े प्राकृतिक हादसे का खतरा मंडरा रहा है।

नेपाली और अमेरिकी वैज्ञानिकों के एक अध्ययन में पता चला है कि एवरेस्ट बेस कैंप पर जुटने वाली पर्वतारोहियों की भीड़, टेंटों से निकलने वाली गर्मी और इंसानी पेशाब हर साल क्लाइंबिंग सीजन के दौरान लगभग 2,500 टन बर्फ को पानी में तब्दील कर रही है।


ग्लेशियर पिघलने की वजह

रीजनल एनवायरनमेंटल चेंज' जर्नल में प्रकाशित नेपाली और अमेरिकी वैज्ञानिकों के अध्ययन में यह चौंकाने वाला खुलासा हुआ है कि ग्लोबल वार्मिंग के अलावा पर्वतारोहियों की गतिविधियां- विशेषकर इंसानी पेशाब और बेस कैंप की गर्मी ग्लेशियर को तेजी से पिघला रही हैं।

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ऊंचाई के कारण अधिक पानी पीने से पर्वतारोहियों द्वारा 2023 के सीजन में प्रतिदिन औसतन 6,766 लीटर पेशाब बहाया गया। वैज्ञानिकों का अनुमान है कि इस मानव निर्मित गर्मी और पेशाब के कारण हर क्लाइंबिंग सीजन में करीब 2,500 टन बर्फ पिघलकर पानी में तब्दील हो रही है।

हर साल लगाए जाते हैं 1600 टेंट

एक अध्ययन के अनुसार, खुम्बु ग्लेशियर पर स्थित एवरेस्ट बेस कैंप में हर साल करीब 1,600 टेंट लगाए जाते हैं, जहां किचन, जनरेटर, वाईफाई और शॉवर जैसी सुविधाओं से निकलने वाली गर्मी जमीन का तापमान बढ़ाती है।

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