इस झील को छूते ही पत्थर बन जाते हैं जीव, क्या है लेक नेट्रॉन का खौफनाक सच?
तंजानिया में स्थित नेट्रॉन झील को दुनिया की सबसे घातक झीलों में गिना जाता है। यह दिखने में जितनी खूबसूरत और सुर्ख लाल है, उतनी ही खतरनाक भी। ...और पढ़ें
Publish Date: Fri, 01 May 2026 04:20:35 PM (IST)Updated Date: Fri, 01 May 2026 04:20:35 PM (IST)
क्या है लेक नेट्रॉन का खौफनाक सच?HighLights
- ज्वालामुखी से निकले सोडियम कार्बोनेट की वजह से जीव ममी बन जाते हैं
- झील का pH लेवल 12 तक है, जो त्वचा को गलाने की ताकत रखता है
- प्राचीन मिस्र के तरीके से यहां कुदरत अपने आप जीवों को संरक्षित कर देती है
डिजिटल डेस्क। तंजानिया में स्थित नेट्रॉन झील को दुनिया की सबसे घातक झीलों में गिना जाता है। यह दिखने में जितनी खूबसूरत और सुर्ख लाल है, उतनी ही खतरनाक भी। लेकिन यहां जीव 'जादू' से नहीं, बल्कि एक खास केमिकल रिएक्शन की वजह से पत्थर (ममी) जैसे बन जाते हैं।
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पानी नहीं, 'अमोनिया' जैसा तेजाब है यहां
इस झील के बगल में 'ओल्डोइन्यो लेंगाई' नाम का एक सक्रिय ज्वालामुखी है। इस ज्वालामुखी से निकलने वाले खास मिनरल्स (सोडियम कार्बोनेट और कैल्शियम कार्बोनेट) गर्म झरनों के जरिए झील में मिलते हैं। यहां के पानी का pH स्तर 10.5 से 12 तक पहुंच जाता है। सरल भाषा में कहें तो इसका पानी इतना 'क्षारीय' (Basic) है जैसे अमोनिया या बाल साफ करने वाला पाउडर। यह पानी इतना पावरफुल है कि किसी भी जीव की त्वचा और आँखों को पल भर में झुलसा सकता है।
ममी बनाने वाला 'प्राचीन फॉर्मूला'
झील में मौजूद सोडियम कार्बोनेट वही रसायन है, जिसका इस्तेमाल प्राचीन मिस्र (Egypt) में लाशों को हजारों साल तक सुरक्षित रखने यानी ममी बनाने के लिए किया जाता था।
- कैसे होता है असर: जब कोई पक्षी या जीव इस झील के पानी में गिरता है, तो पानी उसके शरीर की पूरी नमी और फैट (वसा) को सोख लेता है।
- सड़न का नामोनिशान नहीं: पानी इतना खारा होता है कि शरीर को सड़ाने वाले बैक्टीरिया यहां पैदा ही नहीं हो पाते। नतीजा यह होता है कि जीव सड़ने के बजाय धीरे-धीरे सूखकर पत्थर जैसा सख्त हो जाता है और उस पर नमक की एक सफेद परत चढ़ जाती है।
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तुरंत नहीं बनता पत्थर (भ्रम और सच)
अक्सर लोग समझते हैं कि पानी छूते ही जीव पत्थर बन जाता है, पर ऐसा नहीं है। यह एक लंबी प्रक्रिया है। जब कोई जीव इसमें डूबकर मर जाता है, तब समय के साथ उसका शरीर 'ममी' में बदलता है।
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मौत के बीच भी पलती है जिंदगी
इतनी खतरनाक झील होने के बावजूद कुदरत ने यहां जीवन का रास्ता निकाला है...
- लाल रंग का राज: झील का गहरा लाल रंग यहां पनपने वाले 'साइनोबैक्टीरिया' की वजह से है।
- फ्लेमिंगो का स्वर्ग: हैरानी की बात यह है कि यह झील 'लेसर फ्लेमिंगो' पक्षियों का सबसे पसंदीदा घर है। इन पक्षियों की टांगों पर एक ऐसी सख्त चमड़ी होती है जो उन्हें इस एसिडिक पानी से बचाती है। साथ ही, 'तिलापिया' नाम की मछली भी इस जहरीले पानी में आराम से रहती है।
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