
डिजिटल डेस्क। इन दिनों नेपाल बाढ़ से ग्रसित है। लोगों को रेस्क्यू किया जा रहा है और कोशिश की जा रही है कि प्रभावितों को राहत सामग्री उपलब्ध कराई जाए। इन तमाम हालिया घटनाक्रम के बीच त्रासदी में हजारों लोगों ने अपनी जान गंवाई, कई बेघर और घायल हुए। लोगों के जेहन में यह आपदा जीवनभर घर कर गई है। मगर, शुरुआत में ही एक ऐसा वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ जो शायद नेपाल बाढ़ त्रासदी का जिक्र करते याद आ जाए। लेकिन लोगों के मन में एक सवाल भी है, कि आखिर सिग्नल जाने के बाद क्या हुआ?
नेपाल-तिब्बत सीमा पर स्थित ग्यिरोंग और रसुवागढ़ी क्षेत्र में आई विनाशकारी प्राकृतिक आपदा के उस खौफनाक मंजर को शायद ही कोई भुला पाए। सीसीटीवी फुटेज में स्थानीय समयानुसार सुबह 10:59:53 बजे घाटी से नीचे उतरती पानी, कीचड़, बर्फ और चट्टानों की काली दीवार जब तक कैमरे में कैद हुई, उसके कुछ ही सेकंड बाद सिग्नल अचानक गायब हो गया। स्क्रीन ब्लैंक हो गई, लेकिन उसके बाद के कुछ मिनटों में जो हुआ, वह मानवीय त्रासदी का एक ऐसा अध्याय बन गया जिसे सिर्फ उपग्रह की तस्वीरों और मलबे के अवशेषों से समझा जा सकता है।
सिग्नल जाने के तुरंत बाद रसुवागढ़ी और ग्यिरोंग का वह व्यस्त सीमांत इलाका, जहां कुछ मिनट पहले तक सैकड़ों यात्रियों, व्यापारियों और श्रद्धालुओं की चहल-पहल थी, पूरी तरह जलमग्न और मलबे में तब्दील हो गया। नेपाल और चीन को जोड़ने वाला ऐतिहासिक 'फ्रेंडशिप ब्रिज' ताश के पत्तों की तरह ढहकर उफनती नदी में विलीन हो गया। सीमा पर स्थित नेपाल का इमिग्रेशन और कस्टम कार्यालय, दुकानें, होटल और पार्किंग में खड़े वाहन सेकंडों में नामोनिशान मिटाकर बह गए।
इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड के अनुसार, घटना से ठीक 10 मिनट पहले यानी सुबह 8:35 बजे तक इमिग्रेशन प्रक्रिया चालू थी। 89 विदेशी और नेपाली नागरिक तिब्बत की ओर बढ़ चुके थे। लेकिन सिग्नल कटते ही वे सभी यात्री और सीमा पर तैनात अधिकारी अचानक काल के गाल में समा गए। इमिग्रेशन कार्यालय के प्रमुख समेत चार कर्मचारियों के शव बाद में नदी के निचले हिस्से से मिले, जबकि अंतिम ट्रांजेक्शन दर्ज करने वाली महिला अधिकारी का कोई सुराग नहीं मिल सका।
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अंतरराष्ट्रीय सीमा पर कैलाश मानसरोवर यात्रा पर निकले 100 से अधिक भारतीय श्रद्धालुओं समेत 300 से 400 लोग वहां फंसे हुए थे। कैमरे का सिग्नल बंद होने के बाद प्रकृति के इस विकराल रूप ने पूरी घाटी के भूगोल को ही बदल दिया। घाटे खोला बाजार से लेकर फ्रेंडशिप ब्रिज तक फैला पूरा क्षेत्र अब केवल पत्थरों और कीचड़ का मैदान बनकर रह गया है। उपग्रह की तस्वीरें गवाही देती हैं कि उस एक 10 मिनट के सन्नाटे में सैकड़ों जिंदगियां और दो देशों का संपर्क हमेशा के लिए कट गया।