
डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। मासिक धर्म से जुड़े उत्पादों पर लगने वाला टैक्स, जिसे आमतौर पर पीरियड टैक्स कहा जाता है, लंबे समय से दुनिया के कई देशों में बहस का विषय रहा है। सैनिटरी पैड, टैम्पोन और मेस्ट्रुअल कप जैसे उत्पादों को शुरुआती दौर में विलासिता की वस्तु मानकर उन पर भारी टैक्स लगाया जाता था। समय के साथ जागरूकता बढ़ी और विभिन्न देशों में हुए अभियानों के बाद कई सरकारों ने इन उत्पादों पर लगने वाला टैक्स समाप्त कर दिया। अब इसी दिशा में पाकिस्तान ने भी बड़ा कदम उठाया है।
पाकिस्तान सरकार ने सैनिटरी प्रोडक्ट्स और गर्भनिरोधक उत्पादों पर लगने वाला 18 प्रतिशत सेल्स टैक्स हटाने का फैसला किया है। इसे महिलाओं की स्वास्थ्य सुविधाओं तक बेहतर पहुंच और सम्मानजनक जीवन की दिशा में महत्वपूर्ण निर्णय माना जा रहा है।
पाकिस्तान सरकार ने पिछले सप्ताह पेश किए गए बजट में सैनिटरी आइटम और कॉन्ट्रासेप्टिव (गर्भनिरोधक) उत्पादों पर लगने वाला 18 प्रतिशत सेल्स टैक्स समाप्त करने की घोषणा की। यह फैसला लंबे समय से चल रहे अभियान और कानूनी प्रयासों के बाद सामने आया है।
इस पहल का उद्देश्य महिलाओं के लिए कमर्शियल पीरियड प्रोडक्ट्स को अधिक सुलभ और किफायती बनाना है। वर्तमान में पाकिस्तान में बहुत कम महिलाएं इन उत्पादों का नियमित इस्तेमाल कर पाती हैं, जिसका एक बड़ा कारण उनकी ऊंची कीमत है।
पाकिस्तान के वित्त मंत्री मुहम्मद औरंगजेब ने बजट पेश करते हुए कहा कि सैनिटरी उत्पाद महिलाओं की सेहत, सम्मान और सामाजिक गतिविधियों में उनकी समान भागीदारी के लिए बेहद जरूरी हैं।
उन्होंने यह भी घोषणा की कि सरकार गर्भनिरोधक उत्पादों पर भी टैक्स समाप्त करेगी। उनके अनुसार, पाकिस्तान दुनिया का पांचवां सबसे अधिक आबादी वाला देश है और तेजी से बढ़ती जनसंख्या सरकार के लिए चिंता का विषय है। ऐसे में परिवार नियोजन को सरकार की प्रमुख प्राथमिकताओं में शामिल किया गया है।
पाकिस्तान में पीरियड टैक्स समाप्त करने की पहल का श्रेय दो युवा वकीलों अहसान जहांगीर खान (29) और महनूर ओमर (25) को दिया जा रहा है। दोनों वकीलों ने इस मुद्दे को राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बनाया और सरकार के खिलाफ अदालत में याचिका दायर की। उन्होंने मांग की कि मासिक धर्म से जुड़े उत्पादों को लग्ज़री आइटम की बजाय आवश्यक वस्तुओं की श्रेणी में रखा जाए और उन पर लगाया गया तथाकथित 'पीरियड टैक्स' समाप्त किया जाए। उनकी कानूनी पहल के बाद यह मुद्दा नीति-निर्माताओं और सरकार के सामने प्रमुखता से पहुंचा, जिसके बाद सरकार ने बजट में टैक्स हटाने का फैसला किया।
संयुक्त राष्ट्र बाल कोष UNICEF के अनुसार, पाकिस्तान में केवल 12 प्रतिशत महिलाएं और लड़कियां ही कमर्शियल सैनिटरी प्रोडक्ट्स का इस्तेमाल करती हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि अधिकांश महिलाएं आज भी कपड़े या घर पर तैयार किए गए अन्य विकल्पों का उपयोग करती हैं। इसका प्रमुख कारण सैनिटरी उत्पादों की ऊंची कीमत और सीमित उपलब्धता है।
अक्टूबर में दायर कानूनी याचिका में भी कहा गया था कि स्थानीय स्तर पर बनने वाले सैनिटरी उत्पादों पर 18 प्रतिशत सेल्स टैक्स लगाया जाता है, जबकि आयातित उत्पादों पर 25 प्रतिशत अतिरिक्त कस्टम्स टैक्स देना पड़ता है। इससे इनकी कीमत और अधिक बढ़ जाती है।
UNICEF के अनुसार, स्थानीय करों को जोड़ने के बाद पाकिस्तान में महिलाओं को पीरियड प्रोडक्ट्स खरीदने पर कुल मिलाकर लगभग 40 प्रतिशत तक अतिरिक्त सरचार्ज देना पड़ता है।
इस अतिरिक्त वित्तीय बोझ का सबसे अधिक असर आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग की महिलाओं और किशोरियों पर पड़ता है। विशेषज्ञों का कहना है कि महंगे उत्पादों के कारण बड़ी संख्या में महिलाएं सुरक्षित और गुणवत्तापूर्ण सैनिटरी सामग्री का इस्तेमाल नहीं कर पातीं।
पीरियड टैक्स उस कर को कहा जाता है जो सैनिटरी पैड, टैम्पोन, मेस्ट्रुअल कप और अन्य मासिक धर्म संबंधी उत्पादों पर लगाया जाता है। कई देशों में इन उत्पादों को लंबे समय तक आवश्यक वस्तुओं की बजाय विलासिता की श्रेणी में रखा गया, जिसके कारण इन पर सामान्य उपभोक्ता वस्तुओं की तुलना में अधिक टैक्स लगाया गया। बाद में महिलाओं के अधिकारों और स्वास्थ्य से जुड़े संगठनों ने इसके खिलाफ अभियान चलाए और इसे समाप्त करने की मांग उठाई। आज दुनिया के कई देशों ने इन उत्पादों को टैक्स मुक्त कर दिया है, जबकि कुछ देशों में इन्हें मुफ्त भी उपलब्ध कराया जा रहा है।
पिछले दो दशकों में कई देशों ने मासिक धर्म संबंधी उत्पादों पर लगने वाले टैक्स को कम या पूरी तरह समाप्त किया है।
पीरियड टैक्स समाप्त करने से आगे बढ़ते हुए स्कॉटलैंड दुनिया का पहला ऐसा देश बना जिसने 2021 में 'पीरियड प्रोडक्ट्स फ्री प्रोविज़न एक्ट' लागू किया। इस कानून के तहत सरकारी स्कूलों, विश्वविद्यालयों और सार्वजनिक स्थानों पर मासिक धर्म से जुड़े उत्पाद सभी लोगों के लिए पूरी तरह मुफ्त उपलब्ध कराए जाते हैं। इसे महिलाओं के स्वास्थ्य और समानता की दिशा में दुनिया की सबसे महत्वपूर्ण पहलों में से एक माना जाता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि पाकिस्तान द्वारा सैनिटरी प्रोडक्ट्स और गर्भनिरोधक उत्पादों पर टैक्स समाप्त करने का फैसला महिलाओं की स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। इससे न केवल इन उत्पादों की कीमत कम होगी बल्कि अधिक महिलाओं और किशोरियों के लिए सुरक्षित मासिक धर्म प्रबंधन भी संभव हो सकेगा। साथ ही, यह फैसला महिलाओं के सम्मान, स्वास्थ्य और सामाजिक भागीदारी को मजबूत करने की दिशा में भी अहम माना जा रहा है।