
डिजिटल डेस्क। पाकिस्तान में अल्पसंख्यक हिंदुओं के धार्मिक स्थलों पर हमलों का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। पंजाब प्रांत के नारोवाल जिले स्थित सिराज गांव में एक सदी पुराने ऐतिहासिक मंदिर को ध्वस्त कर दिया गया है। घटना के बाद अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ते हुए पाकिस्तानी प्रशासन ने इस ढांचागत नुकसान का कारण भारी बारिश को बताया है।
स्थानीय निवासियों, अल्पसंख्यक समूहों और राजनीतिक संगठनों का आरोप है कि कट्टरपंथियों ने पास में स्थित एक मदरसे की भूमि का विस्तार करने के उद्देश्य से साजिश के तहत इस प्राचीन मंदिर को ढहाया है।
भारत सरकार ने पाकिस्तान में ऐतिहासिक मंदिर को गिराए जाने की घटना की कठोर शब्दों में निंदा की है। नई दिल्ली ने इस्लामाबाद को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि इस मामले की त्वरित और निष्पक्ष जांच कराई जाए और घटना में शामिल दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए। इसके साथ ही, भारत ने जोर देकर कहा कि पाकिस्तान सरकार अपने देश में रहने वाले अल्पसंख्यक समुदायों की सुरक्षा, उनकी धार्मिक स्वतंत्रता और सांस्कृतिक धरोहरों के संरक्षण की अपनी जिम्मेदारी का पूरी निष्ठा से पालन करे तथा क्षतिग्रस्त मंदिर का पुनर्निर्माण कराए।
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दूसरी ओर, भारतीय विरोध के बाद पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने सफाई देते हुए दावा किया कि 21 जुलाई को हुई भारी वर्षा के कारण इमारत का ढांचा प्रभावित हुआ था। अधिकारियों के अनुसार स्थानीय प्रशासन ने नुकसान का जायजा ले लिया है और इसके जीर्णोद्धार के प्रयास शुरू कर दिए गए हैं।