अमेरिका-ईरान डील के बीच ट्रंप ने खेला इजरायल कार्ड, अब्राहम अकॉर्ड्स में मुस्लिम देशों की एंट्री पर जोर
डोनल्ड ट्रंप ने ईरान-अमेरिका डील को अब्राहम अकॉर्ड्स से जोड़ते हुए कहा है कि मुस्लिम देशों को इजरायल से रिश्ते सामान्य करने होंगे।
Publish Date: Tue, 26 May 2026 02:29:23 PM (IST)Updated Date: Tue, 26 May 2026 02:29:23 PM (IST)
डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान डील से जोड़ा अब्राहम अकॉर्ड्सHighLights
- ट्रंप ने ईरान डील को अब्राहम अकॉर्ड्स से जोड़ा
- डोनाल्ड ट्रंप ने पश्चिम एशिया में शांति का बड़ा दावा किया
- ईरान ने समझौते को लेकर अभी अनिश्चितता जताई है
डिजिटल डेस्क। डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) ने ईरान के साथ संभावित समझौते को लेकर बड़ा बयान दिया है। अमेरिका-ईरान डील की अटकलों के बीच ट्रंप ने कहा कि यह समझौता तभी पूरा माना जाएगा, जब अरब और मुस्लिम देश अब्राहम अकॉर्ड्स (Abraham Accords) में शामिल होंगे।
ट्रंप के मुताबिक सऊदी अरब, कतर, पाकिस्तान, तुर्किए, मिस्त्र, जॉर्डन और बहरीन जैसे देशों को इजरायल के साथ अपने रिश्ते सामान्य करने होंगे। उन्होंने स्पष्ट किया कि जो देश ऐसा नहीं करेंगे, उन्हें ईरान-अमेरिका समझौते का हिस्सा नहीं होना चाहिए।
ट्रंप बोले- ईरान भी बने अकॉर्ड्स का हिस्सा
ट्रंप ने कहा कि अगर ईरान भविष्य में अब्राहम अकॉर्ड्स में शामिल होता है, तो यह सम्मान की बात होगी। उनका दावा है कि अरब और मुस्लिम देशों के इस समझौते में शामिल होने से पश्चिम एशिया में पांच हजार वर्षों में पहली बार स्थायी शांति का रास्ता खुल सकता है।
ट्रंप इस डील को केवल युद्ध रोकने वाला समझौता नहीं, बल्कि पश्चिम एशिया की नई राजनीतिक व्यवस्था के रूप में देख रहे हैं। यही वजह है कि वे क्षेत्र के बड़े मुस्लिम देशों पर इस समझौते से जुड़ने का दबाव बना रहे हैं।
क्या है अब्राहम अकॉर्ड्स?
अब्राहम अकॉर्ड्स की शुरुआत ट्रंप के पहले कार्यकाल में हुई थी। इसका मुख्य उद्देश्य अरब और मुस्लिम देशों के इजरायल के साथ रिश्तों को सामान्य बनाना था। ट्रंप इसे पश्चिम एशिया में शांति स्थापित करने का मॉडल मानते हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर सऊदी अरब, कतर और तुर्किए जैसे देश इस समझौते में शामिल होते हैं, तो क्षेत्रीय राजनीति में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है।
डील आसान होगी या और उलझेगी?
विश्लेषकों के अनुसार अब्राहम अकॉर्ड्स की एंट्री ईरान डील को आसान भी बना सकती है और मुश्किल भी। यदि मुस्लिम देश इजरायल के साथ रिश्ते सामान्य करने के लिए तैयार होते हैं, तो समझौता ऐतिहासिक माना जाएगा। लेकिन अगर वे इससे दूरी बनाए रखते हैं, तो अमेरिका-ईरान वार्ता और जटिल हो सकती है।
ईरान और अमेरिका के अलग-अलग संकेत
इस बीच ईरान ने कहा है कि कई मुद्दों पर बातचीत में प्रगति हुई है, लेकिन फिलहाल अमेरिका के साथ समझौता होता नजर नहीं आ रहा। वहीं अमेरिका की ओर से कहा गया है कि वार्ता में आगे बढ़त हुई है, लेकिन ट्रंप जल्दबाजी में कोई फैसला नहीं करेंगे।