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    जिस वर्साय पैलेस में ट्रंप ने ईरान समझौते पर किए हस्ताक्षर वहीं 107 साल पहले बोए गए थे 'हिटलर के उदय के बीज'..!

    जिस वर्साय पैलेस में आज कूटनीति और शांति की बात हो रही है, उसी महल की दीवारें 107 साल पहले हुए एक ऐसे समझौते की गवाह हैं, जिसने दुनिया को दूसरे विश्व ...और पढ़ें

    By manoj dubeyEdited By: manoj dubey
    Publish Date: Fri, 19 Jun 2026 02:41:48 PM (IST)Updated Date: Fri, 19 Jun 2026 02:43:14 PM (IST)
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    जिस वर्साय पैलेस में ट्रंप ने ईरान समझौते पर किए हस्ताक्षर वहीं 107 साल पहले बोए गए थे 'हिटलर के उदय के बीज'..!

    HighLights

    1. वर्साय पैलेस में फिर इतिहास ने खुद को नए रूप में दोहराया
    2. 1919 की वर्साय संधि ने हिटलर के उभार का रास्ता तैयार किया
    3. 30 अप्रैल 1945 को हिटलर ने आत्महत्या कर ली थी

    मनोज दुबे, नई दिल्ली। पेरिस के ऐतिहासिक वर्साय पैलेस में बुधवार को एक बार फिर इतिहास ने खुद को नए रूप में दोहराया। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान ने दोनों देशों के बीच हुए समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए। इस मौके पर फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों भी मौजूद रहे।

    लेकिन जिस वर्साय पैलेस में आज कूटनीति और शांति की बात हो रही है, उसी महल की दीवारें 107 साल पहले हुए एक ऐसे समझौते की गवाह हैं, जिसने दुनिया को दूसरे विश्व युद्ध की आग में झोंक दिया था। इतिहासकार मानते हैं कि 1919 की वर्साय संधि ने प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से एडॉल्फ हिटलर और नाजीवाद के उभार का रास्ता तैयार किया था।


    🚨 President Donald J. Trump has SIGNED the Iran Memorandum of Understanding at Versailles in France. 🇺🇸 pic.twitter.com/JQ6qlbvFAF

    — The White House (@WhiteHouse) June 17, 2026


    जब खत्म हुआ पहला विश्व युद्ध

    साल 1914 में शुरू हुआ पहला विश्व युद्ध चार वर्षों तक चला। लाखों लोगों की मौत और भारी तबाही के बाद 11 नवंबर 1918 को युद्धविराम हुआ। इसके बाद विजेता देशों अमेरिका, फ्रांस, ब्रिटेन और इटली के नेता पेरिस के वर्साय पैलेस में जुटे ताकि युद्ध के बाद की नई विश्व व्यवस्था तय की जा सके।

    दिलचस्प बात यह थी कि युद्ध हारने वाले देशों, विशेषकर जर्मनी को बातचीत में शामिल ही नहीं किया गया। लगभग छह महीने तक चली चर्चा के बाद 28 जून 1919 को वर्साय की संधि पर हस्ताक्षर हुए।

    naidunia_image

    जर्मनी पर थोपी गईं कड़ी शर्तें

    इस संधि में युद्ध की पूरी जिम्मेदारी जर्मनी पर डाली गई। उसे अपने कई महत्वपूर्ण क्षेत्र छोड़ने पड़े, सेना का आकार सीमित करना पड़ा और भारी आर्थिक हर्जाना भी चुकाने के लिए मजबूर किया गया। विजेता देशों के लिए यह शांति का समझौता था, लेकिन जर्मनी के लिए यह राष्ट्रीय अपमान का प्रतीक बन गया। जर्मन जनता के मन में इसी अपमान और असंतोष ने धीरे-धीरे गहरी जड़ें जमा लीं।

    तब भी चर्चा में थे ‘14 पॉइंट्स’

    दिलचस्प संयोग यह है कि आज अमेरिका-ईरान समझौते में भी 14 प्रमुख बिंदुओं पर सहमति बनी है। ठीक इसी तरह 1918 में तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति वुडरो विल्सन ने विश्व शांति के लिए अपना प्रसिद्ध ‘14 पॉइंट्स प्लान’ पेश किया था।

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    विल्सन का मानना था कि देशों को आत्मनिर्णय का अधिकार मिलना चाहिए, अंतरराष्ट्रीय समझौते पारदर्शी होने चाहिए और भविष्य में युद्ध रोकने के लिए एक वैश्विक संगठन बनाया जाना चाहिए। इसी सोच से आगे चलकर लीग ऑफ नेशंस और बाद में संयुक्त राष्ट्र का जन्म हुआ।

    हालांकि, वर्साय संधि के अंतिम स्वरूप में विल्सन के कई सुझावों को नजरअंदाज कर दिया गया। फ्रांस और ब्रिटेन ने जर्मनी को कठोर सजा देने पर जोर दिया। नतीजा यह हुआ कि शांति स्थापित करने के बजाय संधि ने भविष्य के संघर्षों की जमीन तैयार कर दी।

    कैसे बना हिटलर के उदय का आधार?

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    युद्ध के बाद जर्मनी आर्थिक संकट, बेरोजगारी और राजनीतिक अस्थिरता से जूझने लगा। वर्साय संधि के प्रति जनता का गुस्सा लगातार बढ़ता गया। इसी माहौल का फायदा उठाकर एडॉल्फ हिटलर और उसकी नाजी पार्टी ने राष्ट्रवाद और बदले की राजनीति को हवा दी।

    हिटलर अपने भाषणों में बार-बार वर्साय संधि को जर्मनी की ‘बेइज्जती’ बताता था और उसे खत्म करने का वादा करता था। यही संदेश धीरे-धीरे उसे सत्ता तक ले गया। 1933 में वह जर्मनी का चांसलर बना और छह साल बाद दुनिया दूसरे विश्व युद्ध की आग में झुलसने लगी।

    जब नाजी सेना ने वर्साय पर कर लिया कब्जा

    14 जून 1940 को जर्मन सेना ने फ्रांस में प्रवेश कर वर्साय क्षेत्र पर कब्जा कर लिया। अगले दिन महल की छतों पर नाजी झंडे लहराने लगे। कुछ ही वर्षों में वही स्थान, जहां कभी शांति समझौते पर हस्ताक्षर हुए थे, युद्ध और कब्जे का प्रतीक बन गया।

    1944 में मित्र राष्ट्रों की सेनाओं ने फ्रांस को मुक्त कराने के अभियान के दौरान वर्साय को भी जर्मन नियंत्रण से आजाद कराया। 25 अगस्त 1944 को जर्मन सैनिकों को पीछे हटना पड़ा और शहर ने मित्र देशों की सेनाओं का स्वागत किया।

    इतिहास का अनोखा चक्र

    युद्ध समाप्त होने के बाद ब्रिटिश और अमेरिकी सैनिकों को वर्साय पैलेस के प्रसिद्ध ‘हॉल ऑफ मिरर्स’ में ले जाया गया उसी जगह, जहां 25 साल पहले वर्साय संधि पर हस्ताक्षर हुए थे। कुछ महीनों बाद, 30 अप्रैल 1945 को हिटलर ने आत्महत्या कर ली और मई 1945 में जर्मनी ने आत्मसमर्पण कर दिया।

    इसके साथ ही वह अध्याय समाप्त हुआ, जिसकी जड़ें कई इतिहासकार 1919 की वर्साय संधि तक ले जाकर देखते हैं। आज, जब उसी वर्साय पैलेस में अमेरिका और ईरान के बीच नए समझौते पर हस्ताक्षर हुए हैं, इतिहास एक बार फिर याद दिलाता है कि शांति समझौते सिर्फ युद्ध खत्म नहीं करते, वे आने वाली पीढ़ियों का भविष्य भी तय करते हैं।